कोटा। हाड़ौती क्षेत्र के जैन समुदाय के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर है। तपोभूमि प्रणेता आचार्य 108 श्री प्रज्ञासागर जी महामुनिराज के पावन सानिध्य में कोटा से जहाजपुर तक जिनधर्म प्रभावना पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह धार्मिक यात्रा 14 दिसंबर से प्रारंभ होगी और अपने गहन आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व के कारण क्षेत्र में एक अद्वितीय घटना मानी जा रही है।

महामंत्री नवीन जैन दौराया ने बताया कि यात्रा का शुभारंभ 14 दिसंबर को दोपहर 2 बजे श्री चन्द्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, सिद्धि-सिद्धि नगर, कोटा से किया जाएगा। इस अवसर पर धर्मध्वज रथ, देव रथ, शास्त्र रथ, गुरुपाद रथ, इंद्र रथ एवं सुसज्जित वाद्य रथ की भव्य शोभा यात्रा निकाली जाएगी।

गुरु आस्था परिवार के अध्यक्ष लोकेश जैन ने बताया कि यह पदयात्रा प्रतिदिन सुबह और दोपहर दो चरणों में संपन्न होगी। यात्रा में 700 से अधिक श्रावकों ने पंजीकरण कराया है और सकल दिगंबर जैन समाज समिति का सहयोग भी उपलब्ध है। पदयात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि जिनधर्म प्रभावना, निर्ग्रंथ परंपरा, सच्चे श्रावकों के नियम पालन और संस्कारों के अनुपालन का पुण्य अवसर भी है। मुख्य संयोजक के रूप में मिथुन मित्तल, सह-समन्वयक के रूप में निलेश जैन खटकीडा और अजय जैन मेहरू ने इस आयोजन की जिम्मेदारी संभाली है।

यात्रा का मार्ग भी विशिष्ट रूप से निर्धारित किया गया है। 14 दिसंबर को रिद्धि सिद्धि नगर से बढ़गांव तक यात्रा होगी। इसके पश्चात 15 दिसंबर को सुबह बढ़गांव से तालेड़ा (आहार चर्या) और दोपहर तालेड़ा से तानसेन रईस मिल्स बूंदी रोड तक, 16 दिसंबर को तानसेन से देवपुरा मंदिर बूंदी और दोपहर देवपुरा से नया बाघ हेरिटेज रिसॉर्ट तक यात्रा संपन्न होगी। 17 दिसंबर को नया बाघ हेरिटेज रिसॉर्ट से बंधन रिसॉर्ट और दोपहर में कृषि विश्वविद्यालय, चतरगंज तक, 18 दिसंबर को कृषि विश्वविद्यालय से जगदम्बा सीमेंट, नान तलाई चौराहा और दोपहर में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, मेडिया गांव तक, 19 दिसंबर को मेडिया गांव से सरसिया और दोपहर में अतिशय क्षेत्र जहाजपुर प्रवेश समारोह तक यात्रा जारी रहेगी। अंतिम समापन 20 दिसंबर को 1008 मुनिसुब्रत नाथ भगवान का अभिषेक शांतिधारा एवं यात्रा समापन समारोह के साथ होगा।

मुख्य संयोजक मिथुन मित्तल ने बताया कि पदयात्रा में भाग लेने वाले यात्रियों के लिए कुछ आवश्यक नियम निर्धारित किए गए हैं। रात्रि भोजन निषेध रहेगा और 15 वर्ष से अधिक आयु के ही पदयात्री शामिल हो सकते हैं। यदि परिवारजन साथ हों तो 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे स्वयं की जिम्मेदारी पर यात्रा में भाग ले सकते हैं।

इस प्रकार यह पदयात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि हाड़ौती क्षेत्र के जैन समुदाय के लिए आध्यात्मिक अनुशासन और सामाजिक एकता का संदेश भी लेकर चल रही है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story