कोटा। तपोभूमि के प्रणेता एवं परम पूज्य आचार्य 108 प्रज्ञासागर जी मुनिराज ससंघ का मंगल विहार मंगलवार को श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र केशवरायपाटन से बालिता कुन्हाड़ी तक रहा। इस धार्मिक यात्रा में गुरू आस्था परिवार के अध्यक्ष लोकेश जैन सीसवाली, अर्पित सर्राफ, विनय शाह, रोहित जैन, भूपेंद्र पिड़ावा सहित सैकड़ों श्रद्धालु उनके साथ रहे।

बालिता पहुंचकर आयोजित मंगल जिनदेशना में आचार्य प्रज्ञासागर जी ने कहा कि “ईश्वर की इच्छा सर्वोपरी है। मनुष्य का धर्म केवल कर्म के अनुसार निष्पादन करना है, क्योंकि फल की प्राप्ति कर्मानुसार ही होती है।” उन्होंने यह भी बताया कि उनका बालिता आगमन पूर्व निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह ईश्वरीय इच्छा से संभव हुआ। उनके सान्निध्य में जिन प्रतिमा स्थापना का शुभ समारोह संपन्न होगा।

गुरू आस्था परिवार के चेयरमैन यतीश जैन खेड़ावाला ने बताया कि श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, बालिता में नवीन जिन बिंब की स्थापना की जाएगी। विशेष रूप से गोहटा से प्राप्त पाश्वनार्थ भगवान की 535 वर्ष पुरानी प्रतिमाओं का प्रतिष्ठा समारोह आचार्य प्रज्ञासागर जी मुनिराज के पावन सान्निध्य में संपन्न होगा। महमंत्री नवीन जैन दौराया ने कहा कि विधानाचार्य पंडित उदय जी शास्त्री द्वारा विधिवत प्रतिष्ठा विधान सम्पन्न कराया जाएगा।

मंदिर अध्यक्ष महावीर जैन ने जानकारी दी कि 10 दिसंबर को बालिता मंदिर में वार्षिक उत्सव भी आयोजित होगा। कार्यक्रम प्रातः 10 बजे शांतिधारा एवं अभिषेक से शुरू होगा, जबकि रात्रि 8 बजे महाआरती का आयोजन किया जाएगा।

जिनदेशना में कपिल आगम, नितेश जैन, शैलेन्द्र जैन, त्रिलोक जैन, विकास मजीतिया, मिलाप अजमेरा, अर्पित सर्राफ, अनिल दौराया, सौरभ जैन, अजय मेहरू, लोकेश दमदमा और राजीव पाटनी सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट किया, बल्कि 535 वर्ष पुरानी जिन प्रतिमाओं के संरक्षण और प्रतिष्ठा में एक ऐतिहासिक अध्याय की नींव रखी।

Pratahkal Bureau

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