कोटा में टीम जीवनदाता के सत्यनारायण गुप्ता ने रात में डोनेट की एसडीपी, बूंदी के मरीज की बची जान
बूंदी निवासी चतुर्भुज के परिजन प्लेटलेट्स के लिए हो चुके थे निराश, लायंस क्लब कोटा टेक्नो के भुवनेश गुप्ता के सहयोग से तलवंडी ब्लड सेंटर में रात को हुई व्यवस्था।

कोटा के तलवंडी स्थित ब्लड सेंटर में देर रात गंभीर मरीज के लिए एसडीपी डोनेट करते एलन के कर्मचारी सत्यनारायण गुप्ता और पास में खड़ा उनका बेटा (बाएं से दाएं)। लायंस क्लब कोटा टेक्नो और टीम जीवनदाता के सहयोग से बूंदी निवासी चतुर्भुज के लिए यह प्लेटलेट्स उपलब्ध कराई गई।
मानवता की सेवा और दूसरों की मदद के लिए अपने सुख-सुविधाओं का परित्याग करने वाली 'टीम जीवनदाता' के सेवाभावी डोनर्स इन दिनों दिन-रात एक कर लोगों की जान बचाने में जुटे हैं। निस्वार्थ सेवा भाव से ओत-प्रोत यह टीम लगातार एसडीपी (सिंगल डोनर प्लेटलेट्स) डोनेशन के माध्यम से अब तक सैकड़ों लोगों के जीवन को नवजीवन प्रदान कर चुकी है। इसी कड़ी में देर रात टीम के एक सजग प्रहरी ने निराश, परेशान और हताश हो चुके एक परिवार के जीवन में आशा का नया दीपक प्रज्वलित किया है।
लायंस क्लब कोटा टेक्नो के निदेशक और टीम जीवनदाता के संरक्षक व संयोजक भुवनेश गुप्ता ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि बूंदी निवासी चतुर्भुज को अत्यंत गंभीर स्थिति में तुरंत एसडीपी की महती आवश्यकता थी। पीड़ित चतुर्भुज के परिजन हर तरफ भटकने के बाद भी एसडीपी की व्यवस्था करने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहे थे। लगातार मिल रही विफलता से परिजन अत्यंत परेशान, हताश और पूरी तरह निराश हो चुके थे। इसी घोर संकट के बीच जब पीड़ित पक्ष का संपर्क टीम जीवनदाता से हुआ, तो टीम ने उन्हें तुरंत ढांढस बंधाया और समय पर सहायता उपलब्ध कराने के प्रति पूरी तरह आश्वस्त किया।
परिजनों से संपर्क के तत्काल बाद टीम जीवनदाता ने एलन में कार्यरत सत्यनारायण गुप्ता से संपर्क साधा और उन्हें इस आपातकालीन स्थिति से अवगत कराया। उस समय सत्यनारायण गुप्ता सो चुके थे, लेकिन जैसे ही उन्हें किसी के जीवन की टूटती डोर को थामने और उसकी जान बचाने के पुनीत कार्य का आह्वान किया गया, उन्होंने बिना एक पल गंवाए अपनी नींद और आराम का त्याग कर दिया। वे तुरंत आधी रात को ही तलवंडी स्थित ब्लड सेंटर पहुंचे और वहां अत्यंत तत्परता से एसडीपी डोनेशन कर अपने मानवीय और सामाजिक दायित्व को बखूबी निभाया।
मध्यरात्रि को डोनर की इस त्वरित सक्रियता और सेवा के इस अद्भुत जज्बे को साक्षात देखकर मरीज के अभिभावक गोविंद और उनके साथी पूरी तरह आश्चर्यचकित रह गए। परिजनों ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने सेवा का ऐसा अभूतपूर्व और निस्वार्थ भाव पहले कभी कहीं नहीं देखा, जहां कोई अनजान व्यक्ति अपने सुख-आराम को छोड़कर किसी दूसरे की मदद के लिए आधी रात को उठकर चला आता है। संकट की इस घड़ी में समय पर मिली इस जीवनदायिनी मदद के बाद पीड़ित परिजनों ने रक्तदाता सत्यप्रकाश (सत्यनारायण गुप्ता) सहित पूरी टीम जीवनदाता का हृदय से आभार व्यक्त किया। विपरीत परिस्थितियों में भी टीम जीवनदाता द्वारा किया गया यह सराहनीय प्रयास समाज में मानवता और सेवा की एक अनुकरणीय मिसाल पेश करता है।

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