युग शिरोमणि पूज्य आचार्य भगवंत श्री विद्यासागर जी महा मुनिराज के परम शिष्य एवं नवाचार्य श्री समयसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री निरोग सागर जी महाराज, मुनिश्री निर्मोह सागर जी महाराज, मुनिश्री निरामय सागर जी महाराज एवं मुनिश्री निर्भीक सागर जी महाराज ससंघ तलवंडी जैन मंदिर में विराजमान हैं। आज आयोजित धर्मसभा में संयम, आत्मनियंत्रण और वैराग्य का गहन संदेश दिया गया।

महामंत्री प्रकाश सामरिया ने बताया कि सभा में प्रतिदिन प्रवचन, गुरु भक्ति, शास्त्र स्वाध्याय और ग्रीष्मकालीन वाचना के कार्यक्रमों का संचालन आदि कुमार भैयाजी एवं अनिल डाबी द्वारा किया जा रहा है।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री निरोग सागर जी महाराज ने कहा कि जिस प्रकार घोड़े को नियंत्रित करने के लिए लगाम, हाथी के लिए अंकुश, ऊंट के लिए नकेल और वाहन के सुरक्षित संचालन के लिए ब्रेक आवश्यक होता है, उसी प्रकार मनुष्य के लिए अपने मन और पाँचों इंद्रियों पर नियंत्रण हेतु संयम अनिवार्य है।

उन्होंने प्रेरक दोहा प्रस्तुत करते हुए कहा—

“वश में हों सब इंद्रियां, मन पर लगे लगाम।

वेग बड़े निर्वेग का, दूर नहीं फिर शिवधाम।।"

मुनिश्री ने पाँचों इंद्रियों के प्रभाव को उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि हाथी स्पर्श इंद्रिय, भौंरा गंध, मछली रसना, हिरण श्रवण और पतंगा दृष्टि इंद्रिय के मोह में पड़कर विनाश की ओर अग्रसर हो जाते हैं। इसी प्रकार मनुष्य यदि पाँचों इंद्रियों और चंचल मन के अधीन हो जाए तो वह गंभीर संकटों में पड़ सकता है।

उन्होंने संसार के प्रति वैराग्य भाव और सच्चे देव-शास्त्र-गुरु के प्रति श्रद्धा रखने का आह्वान किया। मुनिश्री ने कहा कि सांसारिक विषयों में आसक्ति जीव को बंधन में डालती है, जबकि संयम, साधना और धर्म के प्रति श्रद्धा जीवन को कल्याण एवं मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “संयम मार्ग ही मोक्ष प्राप्ति का सच्चा पथ है।”

धर्मसभा में विभिन्न उपनगरों से आए श्रद्धालुओं ने श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा सकल समाज द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। कार्यक्रम में प्रकाश बज, विमल नांता, विनोद टोरड़ी एवं मनोज जैसवाल सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।

मंदिर समिति अध्यक्ष अशोक पहाड़िया, महामंत्री प्रकाश सामरिया, मनोज पाटनी, उपेंद्र, सुरेश हरसौरा, युवा शक्ति के पिंकेश, शुभम, राजकुमार, संदीप, पूरी टीम तथा महिला मंडल की अनिला जी झांझरी, सुनीता सामरिया सहित समाज के युवा सदस्यों ने आयोजन व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई।

यह धर्मसभा संयम, आत्मनियंत्रण और वैराग्य के संदेश के साथ श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र बनी रही।

Pratahkal Bureau

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