सृजन द स्पार्क: भव्या पंडित और अनिल श्रीवास्तव की सुरीली प्रस्तुति
कोटा के सी.पी. ऑडिटोरियम में आयोजित लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट में पार्श्वगायिका भव्या पंडित और अनिल श्रीवास्तव ने पुराने और नए गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

सी.पी. ऑडिटोरियम में आयोजित ‘सृजन द स्पार्क’ कार्यक्रम के दौरान मंच पर प्रस्तुति देते पार्श्वगायिका भव्या पंडित, गायक अनिल श्रीवास्तव और उनके सहयोगी संगीतकार।
रविवार की शाम सी.पी. ऑडिटोरियम में आयोजित ‘सृजन द स्पार्क’ के लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट ने संगीत-प्रेमियों को सुरों के ऐसे जादू में बांधा कि वे देर रात तक अपनी सीटों से उठने को तैयार नहीं हुए। सायं 7.15 बजे आरम्भ हुआ यह आयोजन रात गहराने के साथ और अधिक भावपूर्ण होता गया, जहां ‘लग जा गले’ से ‘इश्क सुफीयाना’ तक पुराने और नए गीतों की जुगलबंदी ने वातावरण को संगीतमय बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीपप्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें शिक्षाविद राजेश माहेश्वरी, भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन, एडिशनल कमिश्नर जीएसटी सुनिता डागा, एमकेडीएल राजेश पाटौदी, संस्था अध्यक्ष डॉ. विजय सरदाना, सचिव संजीव अग्रवाल, उपाध्यक्ष अनिमेष जैन, राजकुमार जैन एवं अमित बंसल तथा कोषाध्यक्ष विकास अजमेरा उपस्थित रहे। संस्था के अध्यक्ष डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य प्रतिभाशाली कलाकारों को वैश्विक मंच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि संस्था का मुख्यालय उदयपुर में है और चेयरमैन राजेश खमेरसा तथा सचिव अब्बास अली बंदुकवाला के नेतृत्व में इसकी शाखाएँ देश-विदेश में संचालित हो रही हैं।
शाम की पहली प्रस्तुति में सुप्रसिद्ध पार्श्वगायिका भव्या पंडित ने ‘आओ हुज़ूर’, ‘ये है रेशमी ज़ुल्फ़ों का अंधेरा’, ‘दिल चीज़ क्या है’, ‘लग जा गले’ और ‘मोह मोह के धागे’ जैसे कालजयी गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘रंजिश ही सही’, ‘मुझसे पहली सी मुहब्बत’ और ‘तेरी आँखों के सिवा’ की प्रस्तुति ने ऑडिटोरियम में गहन सन्नाटा भर दिया, जो उनके असाधारण गायन की गवाही बना। ‘काजरा मोहब्बतवाला’, ‘झुमका गिरा रे’ और ‘इश्क़ सुफ़ियाना’ पर श्रोता थिरकने लगे।
रात के अगले चरण में ‘के-किशोर कुमार’ के नाम से विख्यात अनिल श्रीवास्तव ने मंच संभाला और ‘एक हसीना थी’, ‘मेरे सपनों की रानी’, ‘ज़िंदगी एक सफ़र है सुहाना’, ‘ओ हंसिनी’, ‘हमें तुमसे प्यार कितना’ तथा ‘पल पल दिल के पास’ प्रस्तुत कर श्रोताओं को किशोर कुमार की सुनहरी यादों में ले गए।
कार्यक्रम का सबसे भावपूर्ण क्षण तब आया जब दोनों कलाकारों ने ‘तेरे बिना ज़िंदगी से’, ‘कोरा कागज़’, ‘सलामे इश्क़’ और ‘परदेसिया’ जैसे युगल गीत प्रस्तुत किए। ‘चाँद फिर निकला’, ‘छाप तिलक’ और ‘दमादम’ की प्रस्तुति पर ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा। अंतिम पहर में ‘अभी न जाओ छोड़कर’, ‘होठों से छू लो तुम’ और ‘इन आँखों की मस्ती’ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, लेकिन श्रोता देर तक उस संगीतमय अनुभव में डूबे रहे।
कार्यक्रम के प्रोजेक्ट डायरेक्टर विवेक जैन एवं उत्सव बडजात्या रहे। इस अवसर पर संरक्षक प्रेम भाटिया, गोविंद माहेश्वरी, बृजेश माहेश्वरी, नवीन माहेश्वरी, चंद्रशेखर शर्मा, ज्ञान चंद जैन, नितेश माहेश्वरी, संदीप जैन, मनीष पाटनी, कुलदीप माथुर एवं अलंकार सहित बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी उपस्थित रहे और देर रात तक कॉन्सर्ट का आनंद लेते रहे।

Pratahkal Bureau
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