श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र नसियां जी दादाबाड़ी में परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित श्री सिद्धचक्र विधान महामंडल विधान के सातवें दिन श्रद्धा, सम्यग्दर्शन और आत्मबोध पर केंद्रित प्रवचन ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया। मंदिर के निदेशक हुकम जैन काका एवं अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ ने बताया कि विधान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।

निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि जैन धर्म में मोक्षमार्ग का प्रथम सोपान सम्यग्दर्शन है, जिसकी प्राप्ति केवल बाह्य आस्था से नहीं, बल्कि आत्मा के शुद्ध स्वरूप के साक्षात्कार से होती है। उन्होंने कहा कि देव, गुरु और शास्त्र पर श्रद्धा करना मोक्षमार्ग की आधारशिला है। द्रव्यार्थिक दृष्टि से सारतत्त्व, नौ पदार्थ, छह द्रव्य एवं जैन सिद्धांतों पर श्रद्धा करना आवश्यक है, किंतु केवल इन बाह्य तत्त्वों पर विश्वास कर लेने मात्र से सम्यग्दर्शन होना निश्चित नहीं माना जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सभी सम्यग्दर्शन के बाह्य निमित्त हैं।

मुनिश्री ने कहा कि वास्तविक सम्यग्दर्शन तब प्रकट होता है, जब जीव अपने शुद्ध आत्मस्वरूप को पहचानता है। आत्मा को परद्रव्यों से भिन्न जानना, परभावों का त्याग करना तथा आत्मतत्त्व में अटूट श्रद्धा जागृत होना ही सम्यग्दर्शन का वास्तविक स्वरूप है। उन्होंने कहा कि देव, गुरु और शास्त्र साधक को सही दिशा प्रदान करते हैं, किंतु उनकी प्रेरणा से जब अंतःकरण में आत्मबोध का प्रकाश उत्पन्न होता है, तभी सम्यग्दर्शन की अनुभूति होती है। इसलिए बाह्य श्रद्धा तभी सार्थक है, जब वह आत्मानुभूति और तत्त्वज्ञान तक पहुँचाए।

महामंत्री महेन्द्र कासलीवाल ने बताया कि सिद्धचक्र विधान के सातवें दिन विधानाचार्यों के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने पूर्ण विधि-विधान से पूजन-अर्चन, अर्घ्य समर्पण एवं भक्तिभाव के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। प्रवचन के पश्चात श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के मंगल आशीर्वचन ग्रहण कर आत्मकल्याण और धर्म साधना का संकल्प लिया। सम्यग्दर्शन और आत्मबोध पर केंद्रित यह संदेश श्रद्धालुओं के लिए धर्म साधना के मार्ग में आत्मचिंतन का प्रमुख आधार बनकर उभरा।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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