कोटा में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा और रासलीला महोत्सव का आयोजन
श्री धरणीधर जन सेवा संस्थान और धाकड़ समाज द्वारा आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने जीवन और मृत्यु के आध्यात्मिक सूत्रों को समझा।

कोटा के विनोबाभावे नगर स्थित श्री धरणीधर गार्डन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के दूसरे दिन आरती के दौरान उपस्थित श्रद्धालु और कथा श्रवण करते लोग।
विनोबाभावे नगर स्थित श्री धरणीधर गार्डन में आयोजित सात दिवसीय भव्य श्रीमद्भागवत कथा एवं रासलीला महोत्सव के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चिंतन का अनूठा संगम देखने को मिला। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने सुप्रसिद्ध प्रवचन सेवक पं. हरिओम बनेठ वाले के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा का रसपान किया और जीवन के गहन आध्यात्मिक सूत्रों को आत्मसात किया।
श्री धरणीधर जन सेवा संस्थान एवं समस्त धाकड़ समाज, कोटा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव के द्वितीय दिवस पर पं. हरिओम बनेठ वाले ने मानव जीवन, मृत्यु और मोह-माया के संबंध में विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह संसार नश्वर है और प्रत्येक मनुष्य को इसके बंधनों से मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने समझाया कि यदि मनुष्य मृत्यु के समय भी सांसारिक मोह में बंधा रहता है, तो उसी आसक्ति के कारण उसे पुनः जन्म लेना पड़ता है। इसलिए जीवन रहते ही मोह-मुक्त होकर ईश्वर की शरण में जाने का प्रयास करना चाहिए।
कथा के दौरान उन्होंने जीवन का एक प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि जीवन रूपी नाव भले ही माया रूपी संसार के जल में चलती रहे, लेकिन यदि उस नाव के भीतर माया का जल प्रवेश कर जाए तो उसका डूबना निश्चित है। इसी प्रकार मनुष्य संसार में रहते हुए भी मोह और आसक्ति से स्वयं को बचाकर रखे, तभी उसका जीवन सफल हो सकता है।
पं. हरिओम बनेठ वाले ने श्रद्धालुओं को संतुलित और अनुशासित जीवन जीने का संदेश देते हुए कहा कि गृहस्थ जीवन को व्यवस्थित रखने के लिए निश्चित समय-सारणी का पालन आवश्यक है। उन्होंने सलाह दी कि व्यक्ति को सुबह उठकर सबसे पहले भगवान को समय देना चाहिए, इसके बाद माता-पिता, परिवार और अपने कार्य-व्यवसाय की जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने भक्तों को प्रतिदिन मंदिर जाने, घर में ठाकुरजी के नियमित दर्शन करने तथा वर्ष में कम से कम चार बार कथा श्रवण करने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।
कलियुग की महिमा का वर्णन करते हुए कथावाचक ने कहा कि भवसागर से पार होने के लिए यह युग अत्यंत श्रेष्ठ है। उन्होंने कहा कि इस युग में कठिन तपस्या या दुष्कर साधनाओं की अपेक्षा भगवान के नाम का स्मरण ही मोक्ष का सरल मार्ग बन सकता है।
संस्थान के कोषाध्यक्ष महावीर नागर अंथेड़ा ने बताया कि महोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से अपराह्न 3 बजे तक संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। वहीं रात्रि में वृंदावन के ख्यातिप्राप्त कलाकारों द्वारा हरिवल्लभ शर्मा ‘छोटे ठाकुर’ महाराज के निर्देशन में दिव्य रासलीला का मंचन किया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और महारास के सजीव प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
आध्यात्मिक चेतना, भक्ति और जीवन मूल्यों का संदेश देने वाला यह महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आत्ममंथन और जीवन को नई दिशा देने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है।

Pratahkal Bureau
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