कोटा हार्ट एवं श्रीजी हॉस्पिटल: दूरबीन से फेफड़ों का सफल उपचार
वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. विदित सक्सैना ने ब्रोंकोस्कोपी पद्धति से 69 वर्षीय मरीज के 100% कॉलेप्स फेफड़े को ठीक कर वेंटिलेटर से बाहर निकाला।

कोटा के श्रीजी हॉस्पिटल के आई.सी.यू. में भर्ती मरीज राजेंद्र कुमार के फेफड़ों की दूरबीन पद्धति (ब्रोंकोस्कोपी) से सफाई करते डॉ. विदित सक्सैना और उनकी मेडिकल टीम।
कोटा हार्ट एवं श्रीजी हॉस्पिटल: दूरबीन पद्धति से 100% कॉलेप्स फेफड़ों का सफल उपचार
मामले का विवरण
श्रीजी हॉस्पिटल में दूरबीन से 100% कॉलेप्स फेफड़ों का उपचार किया गया। कोटा हार्ट एवं श्रीजी हॉस्पिटल में डॉ. विदित सक्सैना (वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट) द्वारा आई.सी.यू. में भर्ती मरीज़ राजेंद्र कुमार, उम्र 69 का दूरबीन द्वारा फेफड़ों का उपचार किया गया।
मरीज़ की स्थिति
डॉ. विदित सक्सैना ने बताया कि मरीज़ आई.सी.यू. में वेन्टिलेटर पर था और मरीज़ के लेफ्ट साइड का फेफड़ा पूरा सिकुड़ा हुआ था, जिसे चिकित्सकीय भाषा में "कॉलेप्स" कहते हैं।
उपचार प्रक्रिया और निदान
- "डॉ. विदित सक्सैना ने दूरबीन के द्वारा मरीज़ के फेफड़ों की सफाई की एवं बलगम प्लग और रक्त के थक्के हटा दिए।"
- B.A.L. (ब्रोंको एल्वियोलर लैवेज) को जांच के लिए भेजा गया।
- जांच में ड्रग रेजिस्टेंस "Acineto Bacter SSP निमोनिया" पाया गया है।
सफलता और रिकवरी
ब्रोंकोस्कोपी के बाद फेफड़ा पूर्ण रूप से सामान्य स्थिति में आ गया और मरीज़ की हालत भी पहले से बेहतर हो गई है और मरीज़ अब वेन्टिलेटर से बाहर है।
चिकित्सीय महत्व
अस्पताल के निदेशक सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राकेश जिंदल ने बताया कि — "ब्रोंकोस्कोपी के महत्व और आने वाले समय में इन्टरवेन्शन मेडिकल फील्ड के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।"
मेडिकल टीम
अस्पताल के निदेशक डॉ. राकेश जिंदल के अनुसार टीम में निम्नलिखित सदस्य शामिल रहे:
- डॉ. विदित सक्सैना (सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट)
- डॉ. प्राची गोयल (ऐनेस्थेटिस्ट)
- विकास मेवाड़ा (टेक्निशियन)

Pratahkal Bureau
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