16वें तीर्थंकर के मोक्ष कल्याणक पर श्रद्धालुओं ने सम्मेद शिखर जी की परंपरा अनुसार निर्वाण लाडू अर्पित कर विश्व शांति की कामना की।

विज्ञान नगर स्थित दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का जप, तप एवं निर्वाण महोत्सव अगाध श्रद्धा, अटूट आस्था और अभूतपूर्व धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। आयोजन का शुभारंभ प्रातःकाल भगवान के भव्य अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुआ, जिसमें संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया। मांगलिक शांतिधारा करने का पुण्य लाभ राजेंद्र-मंजू पाटनी परिवार तथा रमेशचंद्र-सुनील ठग आवा परिवार को प्राप्त हुआ।

मंदिर समिति के महामंत्री द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, मोक्ष कल्याणक दिवस के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने अत्यंत भक्ति भाव से पूजा-अर्चना की और मंत्रोच्चारण के बीच निर्वाण लाडू अर्पित किया। इस विशेष अनुष्ठान के अंतर्गत निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य इंद्रकुमार-मंजू जैन परिवार को मिला।

समिति के अध्यक्ष राजमल पाटौदी ने आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भगवान शांतिनाथ को सम्मेद शिखर जी स्थित कुंडलपुर के कुंदप्रभ टौंक से मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। उन्होंने रेखांकित किया कि भगवान शांतिनाथ के शासनकाल में ही जैन धर्म की प्रभावना का व्यापक विस्तार हुआ, जिसका मूल मंत्र "अहिंसा परमो धर्मः" आज भी समस्त प्राणीमात्र के कल्याण और वैश्विक शांति के संदेश के रूप में पूरी दुनिया में प्रासंगिक बना हुआ है।

इस गरिमामयी धार्मिक सभा में सीताराम अग्रवाल, महावीर अजमेरा, अनिल ठोरा, पारस धनोपिया, अरविंद ठोरा, रितेश सेठी, अनिल बाकलीवाल, चैतन्य प्रकाश बंसल, कैलाश जैन एवं देवेंद्र गंगवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्ति और अनुशासन के संगम के साथ संपन्न हुआ यह महोत्सव न केवल धार्मिक परंपराओं के निर्वहन का प्रतीक बना, बल्कि समाज में शांति और अहिंसा के शाश्वत मूल्यों को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त प्रेरणा भी सिद्ध हुआ।

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