343 करोड़ का टेंडर और भ्रष्टाचार के आरोप

धारीवाल ने राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) पर गंभीर सवाल उठाए:

  • बायो-मेडिकल उपकरणों की मरम्मत और रखरखाव के लिए 343 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया, जबकि इसकी अनुमानित लागत 168 करोड़ रुपये थी।
  • उनका आरोप था कि RMSCL का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन ऐसी दवाएं खरीदी गईं जिनमें आवश्यक साल्ट तक नहीं था।
  • सरकारी अस्पतालों में करोड़ों रुपये के उपकरण महीनों तक खराब पड़े रहते हैं।

RGHS में 800 करोड़ बकाया और दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) को लेकर भी धारीवाल ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि— "दवा विक्रेताओं का करीब 800 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। आठ महीने से भुगतान नहीं होने के कारण कई दुकानदार मरीजों को दवा देने से इनकार कर रहे हैं।"

मुफ्त दवा योजना की विफलता पर उन्होंने बताया कि 2024 से 2026 के बीच पेनकिलर, एंटीबायोटिक्स और हार्मोनल दवाओं के 795 सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल हुए, जिसका खामियाजा मरीजों और डॉक्टरों दोनों को भुगतना पड़ रहा है।


SMS अस्पताल में आग और जर्जर बुनियादी ढांचा

जयपुर के SMS अस्पताल का जिक्र करते हुए धारीवाल ने सुरक्षा पर प्रहार किया:

  • अक्टूबर 2025 में ट्रॉमा सेंटर के ICU में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी, जिससे ऑपरेशन थिएटर और माइक्रोबायोलॉजी लैब प्रभावित हुए।
  • हाल ही में एक बच्चे के ऑपरेशन के दौरान मशीन में आग लगने की घटना हुई।
  • अस्पतालों में फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी है और जहाँ उपकरण हैं, वहाँ टेस्टिंग नहीं होती।
  • फायर सेफ्टी स्टाफ के पद खाली पड़े हैं और राज्य के करीब 19 प्रतिशत यानी लगभग 2,748 अस्पताल भवन जर्जर हालत में हैं।

RIMS और IPD टावर परियोजना में कटौती

धारीवाल ने सरकार की RIMS परियोजना पर कहा कि जमीनी स्तर पर प्रगति नजर नहीं आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि— "IPD टावर के साथ बनने वाला 8 मंजिला कार्डियोलॉजी विभाग घटाकर 4 मंजिला कर दिया गया। पार्किंग सुविधा भी अधूरी है।" इसके अलावा, इम्प्लांट की खरीद न होने से बुजुर्गों के घुटनों के ऑपरेशन तीन महीनों से रुके हुए हैं।


मेडिकल कॉलेजों की बदहाली: 2550 पद खाली

धारीवाल ने मेडिकल शिक्षा की स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया:

  • 6000 स्वीकृत पदों में से 2550 पद खाली हैं।
  • राजमेस (RajMES) के अधीन मेडिकल कॉलेजों में 2721 में से 1474 मेडिकल टीचर्स के पद रिक्त हैं।
  • नर्सिंग स्टाफ की भर्ती नहीं हो रही है।
  • MCI/NMC गाइडलाइन के अनुसार हर 10 छात्रों पर एक कैडेवर होना चाहिए, लेकिन 200-250 छात्रों के लिए केवल 6 से 10 शव ही उपलब्ध हैं।
  • कई कॉलेजों में शव रखने की पर्याप्त व्यवस्था तक नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि नए मेडिकल कॉलेजों के लिए केंद्र से मिले 1190 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं किए गए।


बजट आवंटन का अल्प उपयोग और ग्रामीण संकट

धारीवाल ने जोधपुर का उदाहरण देते हुए बजट के आंकड़ों पर सवाल उठाए:

  • वर्ष 2024-25 में 635 करोड़ में से केवल 434 करोड़ खर्च हुए।
  • वर्ष 2025-26 में 542 करोड़ में से महज 302 करोड़ ही खर्च किए गए।

सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च नहीं किए गए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और खराब हैं। नए मेडिकल कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है और डॉक्टर उचित वेतन के अभाव में जॉइन नहीं कर रहे।


जनता देगी जवाब

अपने संबोधन के अंत में शांति धारीवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि— "स्वास्थ्य विभाग को प्राथमिकता देने की जरूरत है। अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया तो जनता इसका जवाब देगी।"

Pratahkal Bureau

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