शांति धारीवाल का बजट पर हमला: आंकड़ों के खेल और बढ़ते कर्ज पर घेरा
पूर्व मंत्री शांति धारीवाल ने विधानसभा में विकास दर, पूंजीगत व्यय में कटौती और राज्य पर 10 लाख करोड़ के संभावित कर्ज को लेकर सरकार पर तीखे सवाल उठाए।

राजस्थान विधानसभा में बजट सत्र के दौरान राज्य की वित्तीय स्थिति और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा करते पूर्व मंत्री एवं विधायक शांति धारीवाल।
जयपुर/कोटा, 16 फरवरी: राजस्थान विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान पूर्व मंत्री और विधायक शांति धारीवाल ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। धारीवाल ने विकास दर, कर्ज, कैपिटल एक्सपेंडिचर, केंद्र से मिलने वाली राशि और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सरकार को घेरा और इसे “आंकड़ों का खेल” बताया।
विकास दर पर बोले धारीवाल
“देश 9.60%, राजस्थान 12.56% – हमारे समय में तेज रफ्तार”
धारीवाल ने कहा कि वर्ष 2023-24 में जब देश की जीडीपी वृद्धि दर 9.60 प्रतिशत थी, तब उनके कार्यकाल में राजस्थान की वृद्धि दर 12.56 प्रतिशत रही। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार विकास के दावे तो कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।
कर्ज का बढ़ता बोझ
“तीन साल में 2.21 लाख करोड़ का कर्ज, 10 लाख करोड़ की ओर राज्य”
उन्होंने कहा कि तीन साल में सरकार ने 2 लाख 21 हजार करोड़ रुपये का कर्ज राज्य की जनता पर लाद दिया। धारीवाल का दावा है कि उनके पूरे पांच साल के कार्यकाल में इतना कर्ज नहीं लिया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार के कार्यकाल के अंत तक राजस्थान पर 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हो सकता है।
कैपिटल एक्सपेंडिचर पर सवाल
“बजट में ज्यादा प्रावधान, RE में कटौती, असल खर्च उससे भी कम”
- 2024-25 बजट प्रावधान: 44,216 करोड़ रुपये
- संशोधित अनुमान (RE): 38,288 करोड़ रुपये
- वास्तविक खर्च: 30,726 करोड़ रुपये
- 2025-26 प्रावधान: 53,686 करोड़ (घटाकर 39,429 करोड़ किया गया)
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अखबारों की सुर्खियां बटोरने के लिए बजट में बड़ी घोषणाएं करती है, फिर संशोधित अनुमान में कटौती कर देती है।
अर्थव्यवस्था बनाम जमीनी हकीकत
धारीवाल ने कहा कि देश को चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताकर “गुलाबी तस्वीर” पेश की जा रही है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत 140वें स्थान पर है। उन्होंने केंद्र सरकार के कर्ज पर भी सवाल उठाए—2014 में 55 लाख करोड़ का कर्ज था, जो 31 मार्च 2027 तक 214 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। विदेशी निवेश और रुपये की गिरावट पर सवाल उठाते हुए उन्होंने तंज कसा कि जब डॉलर 92 रुपये के पार है तो क्या अब देश की “इज्जत” नहीं गिर रही?
सेक्टरवार खर्च में कटौती का आरोप
धारीवाल ने आरोप लगाया कि निम्नलिखित क्षेत्रों में भारी कटौती की गई है:
- एग्रो फूड सिस्टम: 6000 करोड़ कम खर्च
- स्वास्थ्य एवं कल्याण: 6000 करोड़ कम
- शिक्षा: 14 हजार करोड़ कम
- सामाजिक सशक्तिकरण: 7000 करोड़ कम
- आधारभूत ढांचे: 17 हजार करोड़ कम
- ग्रामीण विकास: 17 हजार करोड़ कम
सड़क, आवास और अमृत 2.0 की विफलता
“सड़कों और पुलों पर सिर्फ 31 करोड़ खर्च”
धारीवाल ने कहा कि 2024-25 में 32 स्टेट हाइवे, 24 बायपास, 20 रेलवे ओवरब्रिज, 13 फ्लाईओवर और 16 हाई लेवल ब्रिज बनाने की घोषणा हुई थी, लेकिन इन पर खर्च मात्र 31 करोड़ रुपये किया गया।
- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी): 1,24,719 ईडब्ल्यूएस आवासों का लक्ष्य था, केवल 37,897 आवास ही बने।
- अमृत 2.0 योजना: 25 एमएलडी के 5 एसटीपी और 154.90 करोड़ के 27 एसटीपी का लक्ष्य रखा गया, लेकिन एक भी पूरा नहीं हुआ।
घोटाले का आरोप और शिक्षा में कमी
धारीवाल ने आरोप लगाया कि खाद्य सुरक्षा योजना में डीलरों ने 9,000 टन ज्यादा गेहूं बांटने का रिकॉर्ड दिखाया। साथ ही, बालिका सैनिक स्कूल खोलने की घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि दो साल बाद भी एक भी स्कूल शुरू नहीं हुआ।
सरकार पूंजीगत खर्च से भटक गई
विधानसभा में चर्चा के दौरान पूर्व मंत्री व विधायक शांति धारीवाल ने बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूंजीगत खर्च को प्राथमिकता देने की नीति से दूर जा रही है और अधिकांश घोषणाएं कागजों तक सीमित हैं। उन्होंने कहा कि कई योजनाओं को सरकारी मंजूरी तो मिल गई, लेकिन अब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुए। कहीं तकनीकी अड़चन तो कहीं विभागों के बीच समन्वय की कमी से योजनाएं अटकी हुई हैं। उन्होंने सरकार पर “इच्छाशक्ति की कमी” का आरोप भी लगाया।
वित्तीय हालत और FRBM रिपोर्ट
धारीवाल ने विधानसभा में पेश ताजा फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट (FRBM) रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति चिंताजनक है। बीते वर्ष राज्य को निर्धारित सीमा से अधिक राशि Reserve Bank of India से लेनी पड़ी। उन्होंने कहा कि उधार की राशि स्थायी परिसंपत्तियों पर खर्च होनी चाहिए और राजस्व से ऋण व ब्याज चुकाया जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान में राजस्व आय ही पर्याप्त नहीं बच रही। केंद्रीय करों में हिस्सेदारी पर उन्होंने कहा कि पिछले बजट में राज्यों को 6.02 प्रतिशत हिस्सा मिला था, जो अब घटकर 5.92 प्रतिशत रह गया है।
मनरेगा में आवंटन बनाम आवश्यकता
“4 लाख करोड़ की जरूरत, प्रावधान मात्र 1.5 लाख करोड़”
उन्होंने कहा कि लगभग 9 करोड़ सक्रिय जॉब कार्ड परिवारों को 125 दिन रोजगार देने के लिए करीब 4 लाख करोड़ रुपए की जरूरत है, जबकि बजट में मात्र 1.5 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान है, जिसमें राज्यों का 40 प्रतिशत हिस्सा भी शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई प्रावधान मांग आधारित न होकर केंद्र के निर्णयानुसार तय किए जा रहे हैं, जिससे संघीय ढांचे पर प्रश्न खड़े होते हैं।
गोडावण संरक्षण और ऊर्जा परियोजनाएं
ऊर्जा लक्ष्यों पर बोलते हुए धारीवाल ने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने गोडावण संरक्षण क्षेत्र में हाईटेंशन लाइन, सोलर पार्क और पवन चक्कियों पर रोक लगाई है। जैसलमेर में 14,013 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नई विद्युत लाइन बिछाने पर प्रतिबंध लगाया गया है और मौजूदा लाइनों को भूमिगत करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इंदिरा गांधी नहर जैसी नहरों, राजमार्गों और सरकारी भवनों की छतों पर सोलर प्लांट लगाने चाहिए।

Pratahkal Bureau
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