कोटा, जयपुर, 25 फरवरी। राजस्थान विधानसभा में पूर्व मंत्री और विधायक शांति धारीवाल ने नगरीय विकास एवं आवासन विभाग (यूडीएच) को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। तथ्यों और आंकड़ों के साथ उन्होंने सरकार की योजनाओं, बजट प्रावधानों और वास्तविक खर्च के बीच भारी अंतर को उजागर करते हुए कहा कि “विकास की घोषणा करना आसान है, लेकिन उसे जमीन पर उतारना ही असली प्रशासनिक दक्षता है।” धारीवाल ने तंज कसते हुए कहा कि यह है डबल इंजन का कमाल, पैसा लेने जाते हो तो केंद्र काट देता है।

एमओयू हजारों करोड़ के, धरातल पर एक भी नहीं

धारीवाल ने सदन में आंकड़ों की झड़ी लगाते हुए कहा कि नगरीय विकास एवं आवासन विभाग ने 1,21,617 करोड़ रुपये के 637 एमओयू और स्वायत्त शासन विभाग ने 8,624 करोड़ रुपये के 51 एमओयू साइन किए, लेकिन एक भी प्रोजेक्ट जमीन पर नहीं उतरा। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि “कितने एमओयू धरातल पर उतरे, यह सदन को बताया जाए।”

शहरी रोजगार गारंटी योजना: बजट घटाया, रोजगार भी घटाया

उन्होंने बताया कि 2024-25 में इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना में 300 करोड़ का बजट था, लेकिन खर्च केवल 200 करोड़ हुआ। बाद में योजना का नाम बदलकर मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना कर दिया गया और 2026-27 में बजट घटाकर 200 करोड़ कर दिया गया। 2.36 लाख लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य था, लेकिन केवल 1.84 लाख को रोजगार मिला और करीब 50 हजार लोग वंचित रह गए।

सड़कों की मेंटेनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ढिलाई

स्थानीय शहरी सड़कों के रखरखाव के लिए 2024-25 में 700 करोड़ का प्रावधान था, खर्च 300 करोड़ हुआ। 2025-26 में फिर 700 करोड़ रखे, खर्च 200 करोड़। 2026-27 में बजट घटाकर 500 करोड़ कर दिया गया। अरबन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में 2025-26 में 1299 करोड़ की घोषणा हुई मगर खर्च मात्र 20 करोड़ रहा। 2026-27 में 812 करोड़ की घोषणा की गई, लेकिन बजट में केवल 80 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।

अमृत 2.0 और स्वच्छ भारत मिशन: केंद्र से भी कम फंड

अमृत 2.0 के तहत 2147 करोड़ का प्रावधान था, राज्य ने 682 करोड़ खर्च किए। केंद्र से 1690 करोड़ मिलने थे, मिले केवल 190 करोड़। स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 में 346 करोड़ राज्य निधि से रखे गए, खर्च 80 करोड़ हुआ। केंद्र से 366 करोड़ मिलने थे, मिले केवल 90 करोड़। धारीवाल ने कटाक्ष किया कि “यह है डबल इंजन का कमाल, पैसा लेने जाते हो तो केंद्र काट देता है।”

सीवरेज, एसटीपी और शौचालय लक्ष्य अधूरे

अमृत 2.0 के तहत 5100 करोड़ के जलापूर्ति कार्य प्रस्तावित थे, अब तक केवल 1174 करोड़ के कार्यादेश जारी हुए। 25.1 एमएलडी के 5 एसटीपी और 154.90 करोड़ के 27 एसटीपी का लक्ष्य था, एक भी पूरा नहीं हुआ। शौचालय निर्माण में भी भारी कमी देखी गई है जहां 3510 सामुदायिक शौचालय लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 270 बने, 3540 सार्वजनिक शौचालय लक्ष्य के मुकाबले 290 बने, 430 डिजायरेबल शौचालय लक्ष्य के सामने 50 बने और 458 पिंक शौचालय लक्ष्य के मुकाबले 188 ही बन पाए। 1150 इलेक्ट्रिक बसों का वादा किया गया था लेकिन एक भी नहीं आई।

हाउसिंग बोर्ड और जेडीए में भारी रिक्तियां

हाउसिंग बोर्ड को 3467 अधूरे मकान पूरे करने थे, केवल 269 पूरे हुए। 3699 मकान आवंटन का लक्ष्य था, केवल 377 आवंटित हुए। 961 करोड़ खर्च करने थे, खर्च 300 करोड़ हुआ। जेडीए में 2682 पदों में से 1926 रिक्त हैं। एन्फोर्समेंट विंग में 143 में से 122 पद खाली हैं, टाउन प्लानिंग विंग में 127 में से 89 पद खाली हैं, जेईएन सिविल के 534 में 455 पद रिक्त हैं, एईएन सिविल के 107 में 53 खाली हैं और एसई सिविल के 18 में 13 खाली हैं। धारीवाल ने कहा कि “दायरा कई किलोमीटर बढ़ा दिया, काम करने वाला कोई नहीं।”

मास्टर प्लान और मोबिलिटी प्लान पर सुस्ती

उन्होंने कहा कि जयपुर का मास्टर प्लान 2025 में समाप्त हो चुका है, लेकिन नया मास्टर प्लान बनाने की गति बेहद धीमी है। जेडीए की कमेटी में सदस्य तक नहीं हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि मास्टर प्लान से पहले मोबिलिटी प्लान बनाया जाए, 30 चौराहों को सिग्नल फ्री, 25 आरओबी और 5 एलिवेटेड रोड की योजना बने। जयपुर को जाम मुक्त करने के लिए लॉन्ग टर्म कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान और जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की मांग की गई।

पट्टा अभियान और नई नीतियों पर सवाल

धारीवाल ने कहा की चार पट्टा अभियान बीच में ही बंद हो गए। 2.29 लाख आवेदनों में से 1.73 लाख लंबित हैं। टाउनशिप पॉलिसी तीन बार बदली गई, फिर टीडीआर पॉलिसी लाई गई, फिर ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) पॉलिसी आई। धारीवाल ने कहा कि “नीतियां कागजों में बदलती रहीं, जमीन पर हालात जस के तस हैं।”

नियोजित विकास ही असली कसौटी

राजस्थान विधानसभा में धारीवाल ने चेतावनी दी कि यदि मास्टर प्लान, ड्रेनेज, ट्रैफिक और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में यातायात संकट, जलभराव, हरित क्षेत्र समाप्ति और निवेशकों का विश्वास कम होने जैसे गंभीर परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि राजस्थान में नियोजन की समृद्ध परंपरा रही है, लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में घोषणाएं अधिक और क्रियान्वयन नगण्य है। अंत में उन्होंने दोहराया कि “विकास की घोषणा करना आसान है, लेकिन उसे धरातल पर उतारना ही असली प्रशासनिक दक्षता की पहचान है।”

Updated On
Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story