रामगंजमंडी के वरिष्ठ पत्रकार अमित बागौरा गणतंत्र दिवस पर सम्मानित: 'पत्रकारिता समाजसेवा है, दिखावा नहीं'
रामगंजमंडी के वरिष्ठ पत्रकार अमित बागौरा को गणतंत्र दिवस 2026 पर प्रशासन ने निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता के लिए सम्मानित किया। स्वर्गीय आर.के. बागौरा की विरासत को आगे बढ़ाते हुए अमित बागौरा ने पत्रकारिता को समाजसेवा का माध्यम बताया और शिक्षा व रोजगार के विकास पर जोर दिया। पढ़िए, एक पत्रकार के संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी।

रामगंजमंडी। पत्रकारिता के क्षेत्र में निष्पक्षता, निडरता और ईमानदारी की स्याही से जन-जन की आवाज बुलंद करने वाले युवा संपादक अमित बागौरा को गणतंत्र दिवस 2026 के गौरवशाली अवसर पर प्रशासन द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया गया। स्थानीय प्रशासन ने उनके वर्षों के कड़े संघर्ष और सरकार की योजनाओं व जनता की ज्वलंत समस्याओं को शासन तक पहुंचाने की उनकी अटूट निष्ठा को रेखांकित करते हुए यह सम्मान प्रदान किया। समारोह के दौरान उप जिला कलेक्टर चारु वर्मा, तहसीलदार नेहा वर्मा, डीएसपी घनश्याम मीणा, नगरपालिका अध्यक्ष अखलेश मेड़तवाल, और नगरपालिका अधिशासी अधिकारी तरुण लहरी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने अमित बागौरा को शील्ड व प्रतीक चिन्ह भेंट कर उनकी पत्रकारिता को समाजसेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
यह क्षण केवल एक सम्मान मात्र नहीं था, बल्कि उस विरासत की जीत थी जिसे 'कलवेद' समाचार पत्र के संस्थापक और रामगंजमंडी के सबसे पुराने वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय आर.के. बागौरा ने अपने खून-पसीने से सींचा था। दूसरी बार इस सम्मान से नवाजे जाने पर भावुक होते हुए संपादक अमित बागौरा ने अपनी सफलता का पूर्ण श्रेय परमपिता परमेश्वर और अपने स्वर्गीय पिताजी के चरणों में समर्पित किया। उन्होंने पत्रकारिता की गरिमा पर कड़ा संदेश देते हुए कहा कि पत्रकारिता कोई दिखावा या किसी की नौकरी नहीं है। यह सत्य लिखने का जज्बा और उसे स्वीकार करने का साहस है, जिसे बाजार में मोल नहीं खरीदा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पत्रकारिता कोई 'हलवा' नहीं है जिसे आसानी से निगला जा सके; इसमें एक वैज्ञानिक की खोज की तरह वर्षों की तपस्या और अनुशासन की आवश्यकता होती है।
अमित बागौरा ने अपने पिता के संघर्षों को याद करते हुए बताया कि उनके आदर्श पिता ने 28 वर्षों तक बिना भोजन किए पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा की, और आज उन्हीं के सिखाए गए नियमों और 'रोडमैप' की बदौलत वे इस मुकाम पर खड़े हैं। उन्होंने अपनी माताजी के आशीर्वाद और क्षेत्र की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें सीखना कभी बंद नहीं करना चाहिए। पत्रकारिता के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार के क्षेत्रों में विकास की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि युवा आत्मनिर्भर बन सकें। इस उपलब्धि पर उन्होंने हाड़ौती के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र 'कलवेद' के पाठकों, विज्ञापनदाताओं और शुभचिंतकों का हृदय से आभार व्यक्त किया। यह सम्मान न केवल एक व्यक्ति का है, बल्कि रामगंजमंडी की उस जागरूक पत्रकारिता का है जो आज भी समाज का दर्पण बनी हुई है।

