कोटा में यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज का प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
सवर्ण समाज मंच ने सीएडी ग्राउंड से संभागीय आयुक्त कार्यालय तक आक्रोश रैली निकाल कर कानून में संशोधन और झूठी शिकायतों पर रोक की मांग की।

कोटा में सोमवार को यूजीसी के विवादित प्रावधानों के विरोध में टायर जलाकर प्रदर्शन करते सवर्ण समाज मंच के कार्यकर्ता और पदाधिकारी।
कोटा, 2 फरवरी। यूजीसी द्वारा लागू किए गए विवादित कानून के विरोध में सोमवार को सवर्ण समाज मंच कोटा के नेतृत्व में शहर में जबरदस्त जनआक्रोश देखने को मिला। सैकड़ों की संख्या में समाजजन सीएडी ग्राउंड पर एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए टायर जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने इस कानून को “काला कानून” बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने एवं संशोधन करने की मांग की।
टायर जलाकर जताया आक्रोश: सीआईडी ग्राउंड से रैली का आगाज
दोपहर करीब 12 बजे सीआईडी ग्राउंड से आक्रोश रैली प्रारंभ हुई, जो प्रमुख मार्गों से होते हुए संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंची। रैली के दौरान “यूजीसी का काला कानून वापस लो”, “हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित करो”, “सरकार होश में आओ” जैसे गगनभेदी नारे लगाए गए। इसके पश्चात प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन संभागीय आयुक्त को सौंपा गया।
सवर्ण समाज की एकता ने दिखाई ताकत
इस आंदोलन में समाज के सभी घटकों युवा, महिलाएं, वरिष्ठजन एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने सवर्ण समाज की मजबूत एकजुटता का संदेश दिया। वक्ताओं ने कहा कि:
"यह आंदोलन केवल एक कानून के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के भविष्य, सम्मान और अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। सवर्ण समाज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अन्याय के खिलाफ वह संगठित होकर निर्णायक संघर्ष करेगा।"
सरकार को चेतावनी: उग्र आंदोलन की तैयारी
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि यूजीसी के इस कानून में शीघ्र संशोधन नहीं किया गया, तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्तर तक विस्तार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कानून समाज के छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करता है और संविधान द्वारा प्रदत्त न्याय की मूल भावना और समानता के विरुद्ध है।
कानून के प्रावधानों पर उठाए गंभीर सवाल
वक्ताओं ने कहा कि इस कानून में निम्नलिखित खामियां हैं:
- झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई का प्रावधान नहीं है।
- शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है।
- आरोपी को पहले ही दोषी मान लिया जाता है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
- इससे निर्दोष लोगों को मानसिक, सामाजिक और कानूनी उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है।
प्रमुख मांगें और आगामी रणनीति
प्रदर्शन के दौरान अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी उठाई गईं:
- एससी-एसटी एक्ट में गिरफ्तारी से पहले जांच की अनिवार्यता।
- जनरल सीट पर जनरल वर्ग के उम्मीदवार को ही चुनाव लड़ने का अधिकार।
- ईडब्ल्यूएस वर्ग को राजनीतिक आरक्षण देने की मांग।
- अंतरजातीय विवाह के नाम पर दी जा रही अनियमित सहायता योजनाओं पर पुनर्विचार।
- यूजीसी कानून में तत्काल संशोधन और झूठी शिकायत पर कठोर दंड का प्रावधान।
- जांच समिति में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व और सभी वर्गों को समान शिकायत अधिकार।
- जाति के आधार पर अपराध निर्धारण बंद करने की मांग।
- सवर्ण समाज के विद्यार्थियों को भी समान सुरक्षा अधिकार देने की मांग।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो आने वाले दिनों में कोटा की प्रमुख सड़कों पर चक्का जाम आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी।

Bhagvati Medatwal, Kota
नाम: भगवती मेड़तवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)
कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र
बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय
परिचय
भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।
