जयपुर/कोटा, 14 फरवरी

राजस्थान इंजीनियरिंग कॉलेज सोसाइटी द्वारा आयोजित एक दिवसीय संवाद कार्यक्रम में राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी ने संबद्ध निजी इंजीनियरिंग कॉलेजो के चैयरमेन, प्राचार्य एवं निदेशको से प्रत्यक्ष संवाद किया और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

संवाद कार्यक्रम के उद्देश्य एवं उपस्थिति

आरटीयू के सह जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि इस संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय और संबद्ध निजी इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के बीच शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान सहयोग तथा छात्र-हितैषी पहलों को सुदृढ़ करना था।

विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि: डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. आनंद चतुर्वेदी, डीन फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड आर्किटेक्चर प्रो. संदीप पाराशर, डीन एडमिशन प्रो. गीतेश विजय, डीन एमसीए प्रो.एन के जोशी, एवं आरटीयू कुलगुरु के ओएसडी डॉ. अजय शर्मा उपस्थित रहे। एसोसिएशन के प्रतिनिधि: राजस्थान इंजीनियरिंग कॉलेज एसोसिएशन से संरक्षक सुरजाराम मील, अध्यक्ष अनुराग अग्रवाल एवं सचिव श्रीधर सिंह ने विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त किया। सुदृढ़ शिक्षा और पारदर्शी व्यवस्था पर कुलगुरु के विचार

कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी ने संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि:

"विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालय के बीच सतत, स्पष्ट और सकारात्मक संवाद शैक्षणिक उत्कृष्टता, प्रशासनिक दक्षता, कल्याण और सशक्त संबंधों के लिए अनिवार्य है। प्रभावी संवाद से शिक्षा व्यवस्था अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनती है। आपसी सुदृढ़ संवाद शैक्षणिक उत्कृष्टता और संस्थागत विकास का आधार भी है। प्रभावी संवाद प्रणाली से ही उच्च शिक्षा प्रणाली सशक्त और उत्तरदायी बन सकती है।"

उन्होंने आशा व्यक्त कि, विश्वविद्यालय और निजी महाविद्यालय अपने हितों को सुदृढ़ करते हुए एक मंच पर आकर तकनीकी शिक्षा कि उन्नति का साँझा प्रयास करेंगे। निश्चय ही इस नवाचार के आशाजनक परिणाम आएंगे।

तकनीकी शिक्षा में नवाचार और अनुसंधान पर बल

संवाद कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो. चौधरी ने नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, उद्योग-अकादमिक साझेदारी, स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने तथा अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार को समय की आवश्यकता बताया।

अपने सम्बोधन में कुलगुरु ने कहा कि:

"वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में इंजीनियरिंग शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर व्यावहारिक कौशल, उद्योग-अनुभव एवं नवाचार से जोड़ना आवश्यक है।"

उन्होंने नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल देते हुए बहुविषयक शिक्षा, कौशल-आधारित प्रशिक्षण तथा स्टार्टअप एवं उद्यमिता को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर बल दिया।

सामाजिक उत्तरदायित्व एवं भविष्य की दिशा

उन्होंने निजी महाविद्यालयों के प्रबंधन से कहा कि तकनीकी दक्षता के साथ नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह संवाद कार्यक्रम विश्वविद्यालय और निजी महाविद्यालयों के मध्य समन्वय एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास था।

उन्होंने संस्थान को उद्योग-अकादमिक साझेदारी मजबूत करने, शोध परियोजनाओं में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने तथा इंटर्नशिप एवं प्लेसमेंट अवसरों को विस्तारित करने के लिए सुझाव दिया।

Pratahkal Newsroom

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