माउंट आबू स्थित ज्ञान सरोवर में ब्रह्मकुमारीज़ के शिक्षा प्रभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय 'एजुकेशन बियॉन्ड डिग्रीज़' (डिग्री से परे शिक्षा) कॉन्फ्रेंस में राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) के कुलगुरु प्रोफेसर निमित चौधरी ने शिक्षाविदों को संबोधित करते हुए युवाओं के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया। इस उच्च स्तरीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करने की पारंपरिक पद्धति के बजाय छात्रों में सकारात्मक सोच, चरित्र निर्माण और उनके समग्र व्यक्तित्व विकास को प्राथमिकता देना था। राजस्थान के माउंट आबू में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में आरटीयू कुलगुरु प्रोफेसर निमित चौधरी ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर अपने विचार साझा किए। सम्मेलन में राजयोगिनी बीके सुदेश दीदी, एससीईआरटी दिल्ली की निदेशक डॉ. रीता शर्मा और गुजरात राज्य संस्कृत बोर्ड के अध्यक्ष श्री हिमांजल पालीवाल सहित देश के कई प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने मूल्य-आधारित शिक्षा की महत्ता पर गहन चर्चा की।

सह जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, कुलगुरु प्रोफेसर निमित चौधरी ने ब्रह्मकुमारीज़ के शिक्षा प्रभाग द्वारा मूल्य-आधारित शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को वर्तमान समय में अत्यधिक प्रभावी और प्रासंगिक करार दिया। अपने संबोधन में उन्होंने रेखांकित किया कि ब्रह्मकुमारीज़ का शिक्षा प्रभाग 'नई शिक्षा नीति 2020' के अनुरूप युवाओं को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक है। प्रोफेसर चौधरी ने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि छात्रों की मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक उन्नति पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

कुलगुरु ने अपने संदेश में विश्वविद्यालय में संचालित 'थॉट एंड इन्नोवेशन सेंटर' की भूमिका पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस केंद्र के माध्यम से छात्रों में ध्यान, आत्म-जागरूकता और सकारात्मक सोच का संचार हुआ है, जिससे उनके जीवन में उल्लेखनीय और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि ब्रह्मकुमारीज़ के साथ थॉट एंड इन्नोवेशन सेंटर के जुड़ाव ने इसकी गतिविधियों को और अधिक प्रभावशाली बना दिया है, जिससे विद्यार्थियों में आध्यात्मिकता के प्रति रुचि और जागरूकता बढ़ी है। यह पहल न केवल छात्रों को शैक्षणिक रूप से सुदृढ़ कर रही है, बल्कि उन्हें एक संतुलित, जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनने के लिए भी निरंतर प्रेरित कर रही है।

थॉट एंड इन्नोवेशन सेंटर की मुख्य समन्वयक डॉक्टर लता गिदवानी ने कॉन्फ्रेंस के निष्कर्षों पर जानकारी देते हुए बताया कि इस पांच दिवसीय आयोजन से यह प्रमुख संदेश उभरकर सामने आया है कि शिक्षा का वास्तविक ध्येय केवल रोजगार प्राप्ति नहीं, अपितु एक श्रेष्ठ और नैतिक व्यक्तित्व का निर्माण करना है। उच्च शिक्षा में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को समाहित करने की दिशा में ब्रह्मकुमारीज़ और राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय का यह संयुक्त प्रयास एक प्रेरणादायक मिसाल पेश कर रहा है।

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