आरटीयू कोटा के विद्यार्थियों ने ब्रह्माकुमारीज में किया आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों का प्रदर्शन
थॉट एंड इनोवेशन सेंटर के छात्रों ने म्यूज़ और माइंडवेव डिवाइस के जरिए ध्यान और मेडिटेशन का मानव मस्तिष्क पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव का लाइव परीक्षण किया।

राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) कोटा का 'थॉट एंड इनोवेशन सेंटर' नवाचार और कौशल विकास की दिशा में नित नए आयाम स्थापित कर रहा है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर निमित चौधरी के कुशल मार्गदर्शन और प्रेरणादायी नेतृत्व में केंद्र द्वारा शोध गतिविधियों को गति प्रदान की जा रही है। इसी श्रृंखला में एक उल्लेखनीय मील का पत्थर स्थापित करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा ब्रह्माकुमारीज के स्पिरिचुअल रिसर्च सेंटर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जो विज्ञान और आध्यात्मिकता के समन्वय का जीवंत उदाहरण बना।
सह जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ के अनुसार, इस गरिमामय आयोजन में स्पार्क विंग के लगभग 1300 सदस्यों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के दौरान सेंटर की चीफ कोऑर्डिनेटर डॉ. लता गिदवानी के नेतृत्व में वालंटियर टीम ने एक अत्यंत प्रभावशाली प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया, जिसकी सफलता पर उन्होंने पूरी टीम को शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों का लाइव डेमोंस्ट्रेशन रहा। प्रदर्शन के दौरान म्यूज़ (Muse), ई-सेंस (eSense), काइंड फील्ड (Kind Field), पी आई पी स्ट्रेस ट्रैकर (PIP Stress Tracker), माइंडवेव (MindWave) और माइंड फ्लेक्स (Mind Flex) जैसे अत्याधुनिक डिवाइस का उपयोग किया गया। इन उपकरणों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह के मानसिक तनाव, एकाग्रता और भावनात्मक स्थिति का सटीक वैज्ञानिक परीक्षण किया गया।
इन वैज्ञानिक परीक्षणों के परिणामों ने प्रत्यक्ष रूप से यह सिद्ध किया कि ध्यान और मेडिटेशन का मानव मस्तिष्क पर गहरा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कार्यक्रम की सफलता में वालंटियर ट्रेनर प्रदीप गुप्ता, काउंसलर विनोद, छात्र वालंटियर मनोज, नितेश, नितिन, विष्णु, नवीन और धीरज अजमेरा ने सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्पार्क विंग के नेशनल कोऑर्डिनेटर बीके श्रीकांत भाई ने थॉट एंड इनोवेशन सेंटर की गतिविधियों की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए इसे विज्ञान और अध्यात्म के अद्भुत संगम का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। यह आयोजन समाज के लिए एक प्रेरणादायक पहल सिद्ध हुआ, जिसने यह स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक तकनीकों द्वारा मानसिक स्थिति का विश्लेषण कर और उसे अध्यात्म से जोड़कर जीवन को अधिक संतुलित, शांत और सफल बनाया जा सकता है।

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