राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) कोटा के 140 सेवानिवृत्त कार्मिकों का पेंशन का सपना वर्षों बीत जाने के बाद भी अधूरा है, जिसके चलते वे वर्तमान में घोर आर्थिक संकट और कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कोटा के विधायक संदीप शर्मा ने शुक्रवार को आरटीयू के कुलपति प्रो. निमित रंजन चौधरी के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। उन्होंने राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा और अतिरिक्त मुख्य सचिव कुलदीप रांका से मुलाकात कर इस मानवीय मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया है। विधायक ने मांग की है कि पेंशन प्रक्रिया पूरी होने तक इन सेवानिवृत्त कार्मिकों को प्रोविजनल पेंशन दी जाए ताकि वरिष्ठ नागरिक सम्मानजनक जीवन जी सकें।

इस मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, पूर्व में राजस्थान सरकार के वित्त और तकनीकी शिक्षा विभाग ने आरटीयू कर्मियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने के निर्देश दिए थे। इन आदेशों के अनुपालन में विश्वविद्यालय के 111 पेंशनभोगियों ने अपनी जमा पूंजी, भविष्य निधि की राशि, अपनी स्थायी संपत्ति बेचकर और यहां तक कि कर्ज लेकर लगभग 22 करोड़ रुपये की राशि विश्वविद्यालय में जमा कराई थी। प्रशासन की शिथिलता और प्रक्रियागत जटिलताओं के चलते यह मामला वर्षों से फाइलों में उलझा हुआ है। वर्तमान में विश्वविद्यालय के पीडी खाते में 65 करोड़ रुपये की राशि जमा होने के बावजूद 140 पेंशनर्स अपनी मेहनत की कमाई मिलने की बाट जोह रहे हैं।

हाल ही में आयोजित आरटीयू के प्रबंध मण्डल की 49वीं बैठक में विश्वविद्यालय के कर्मचारियों पर राजस्थान सिविल सेवा पेंशन नियम 1996 और राजस्थान राज्य कर्मचारी सामान्य प्रावधायी निधि नियम 2021 को लागू करने पर सर्वसम्मति से सहमति बनी है। इस प्रस्ताव को स्वीकृति हेतु महामहिम राज्यपाल और तकनीकी शिक्षा विभाग के पास भेजा गया है। विधायक संदीप शर्मा ने इस प्रस्ताव को तत्काल पारित कराने पर जोर दिया है। मंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा ने कार्मिकों की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए आश्वस्त किया है कि वे व्यक्तिगत स्तर पर इस दिशा में प्रयास करेंगे ताकि जीवनभर सेवा देने वाले इन कर्मचारियों को जल्द से जल्द उनका हक मिल सके।

पेंशन मुद्दे के अतिरिक्त, बैठक में आरटीयू के शैक्षणिक उत्थान पर भी चर्चा की गई। कुलपति और विधायक ने विश्वविद्यालय में ड्रोन, रोबोटिक्स और एआई जैसे आधुनिक पाठ्यक्रमों के संचालन, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना, आधारभूत सुविधाओं के विकास और अतिथि संकाय सदस्यों के मानदेय में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर तकनीकी शिक्षा मंत्री के साथ गहन विमर्श किया। यह बैठक तकनीकी विश्वविद्यालय के न केवल प्रशासनिक सुधार बल्कि भविष्य की शैक्षणिक संभावनाओं को भी नई दिशा देने का प्रयास है, जिसका मुख्य केंद्र सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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