राजस्थान एकाउन्टेन्ट्स एसोसिएशन ने निलंबन को नियम विरुद्ध बताते हुए राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा और निष्पक्ष जांच की मांग की।

राजस्थान एकाउन्टेन्ट्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा में तीन लेखाकर्मियों के नियम विरुद्ध निलंबन और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर जिला कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा।
राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आर.टी.यू.) कोटा में तीन अधीनस्थ लेखाकर्मियों के नियम विरुद्ध निलंबन का मामला तूल पकड़ने लगा है। राजस्थान एकाउन्टेन्ट्स एसोसिएशन ने विश्वविद्यालय प्रशासन की इस कार्रवाई को द्वेषतापूर्ण बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई नहीं होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज जैन ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 07 अक्टूबर 2026 को बिना अधिकार के एक साथ तीन लेखाकर्मियों को निलंबित कर दिया। इनमें जितेन्द्र कुमार साहू, सहायक लेखाधिकारी ग्रेड-I, दीपक कुमार यादव, कनिष्ठ लेखाकार और लोकेश सैनी, कनिष्ठ लेखाकार शामिल हैं। एसोसिएशन ने तीनों कार्मिकों के निलंबन को नियम विरुद्ध बताते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
एसोसिएशन का आरोप है कि निलंबन के अगले दिन, 08 अक्टूबर 2026 को तकनीकी विश्वविद्यालय में एक छात्र की मौत के मामले को इन तीनों लेखाकर्मियों से जोड़कर समाचार पत्र में भ्रामक समाचार प्रकाशित करवाया गया। एसोसिएशन के अनुसार, समाचार प्रकाशित होने से एक दिन पहले ही तीनों कार्मिकों को निलंबित किया जा चुका था। संगठन का कहना है कि इस घटनाक्रम से लेखाकर्मियों की छवि धूमिल हुई है और विश्वविद्यालय के छात्रों में उनके प्रति रोष पैदा हुआ है।
जिला मंत्री सत्यनारायण गुर्जर ने बताया कि एसोसिएशन ने महामहिम राज्यपाल को जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और तीनों कार्मिकों का राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय से अन्यत्र स्थानांतरण करने की मांग की गई है। एसोसिएशन का कहना है कि यह कदम इसलिए जरूरी है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
वहीं, एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री देवीसहाय मीणा ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। तीन लेखाकर्मियों के निलंबन, छात्र की मौत के मामले से उनका नाम जोड़े जाने और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर अब विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई पर एसोसिएशन का रुख सख्त हो गया है।

