कोटा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर गुरुवार को कोटा महानगर में शिक्षा जगत से जुड़े प्रबुद्धजनों हेतु एक गरिमामयी विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के सर्वांगीण उत्थान और वैचारिक सुदृढ़ीकरण पर व्यापक मंथन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चित्तौड़ प्रांत के प्रांत प्रचारक मुरलीधर ने संघ के ध्येय को स्पष्ट करते हुए कहा कि संघ पिछले 100 वर्षों से निरंतर व्यक्ति निर्माण के कार्य में संलग्न है और भविष्य में भी यह यात्रा अनवरत जारी रहेगी। इस महत्वपूर्ण गोष्ठी में कोटा विभाग संघ चालक पन्नालाल शर्मा एवं कोटा महानगर संघचालक गोपाल गर्ग भी मंचासीन रहे।

प्रांत प्रचारक मुरलीधर ने अपने उद्बोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि संघ का मूल उद्देश्य व्यक्ति निर्माण है, जिसके माध्यम से स्वयंसेवक विभिन्न संगठनों के जरिए समाज के प्रत्येक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में संघ के स्वयंसेवक ‘व्यवस्था परिवर्तन’ एवं ‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से सामाजिक बदलाव के कार्यों को निर्णायक गति प्रदान करेंगे, जिसका एकमात्र ध्येय “भारत माता की जय” की भावना को जन-जन में सुदृढ़ करना है। उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि संघ का विचार वस्तुतः भारत, हिंदू और सनातन संस्कृति के शाश्वत मूल्यों का ही प्रतिनिधित्व करता है।

इस प्रबुद्ध गोष्ठी में कोटा के प्रतिष्ठित उच्च शैक्षणिक संस्थानों, जिनमें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (RTU), कोटा विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय एवं राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय सहित विभिन्न राजकीय व निजी महाविद्यालयों के कार्यरत एवं सेवानिवृत्त आचार्य, प्राध्यापक, शोधार्थी और वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित हुए।

वैचारिक विमर्श को विस्तार देते हुए मुरलीधर जी ने कहा कि संघ का कार्य “सर्वेषाम अविरोधेन” के सिद्धांत पर आधारित है, अर्थात यह किसी के विरोध में नहीं बल्कि समाज के समग्र और एकात्म विकास के लिए समर्पित है। उन्होंने आह्वान किया कि जब तक संपूर्ण समाज इस विचार को आत्मसात नहीं कर लेता, तब तक संघ का यह अभियान रुकने वाला नहीं है। समापन सत्र में उन्होंने समाजव्यापी जागरूकता के माध्यम से राष्ट्र को सशक्त बनाने हेतु ‘पंच परिवर्तन’ की अनिवार्यता बताई और शिक्षण संस्थानों को अराष्ट्रीय एवं असामाजिक गतिविधियों से मुक्त रखने की अपील की। कार्यक्रम के अंतिम चरण में उपस्थित बुद्धिजीवियों ने जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन, शिक्षा के स्तर में सुधार तथा गौ संरक्षण जैसे गंभीर विषयों पर अपने अनुभवी सुझाव साझा करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।

Pratahkal Hub

Pratahkal Hub

प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"

Next Story