हिंदुत्व ही हमारे देश का राष्ट्रीयत्व है: कोटा में बोले आरएसएस नेता बलिराम
कोटा के महावीर नगर में आयोजित विचार गोष्ठी में अखिल भारतीय सामाजिक सद्भावना प्रमुख बलिराम ने कहा कि हिंदुस्तान एक हिंदू राष्ट्र है और राष्ट्र एक सांस्कृतिक चेतना है।

कोटा के महावीर नगर प्रथम स्थित सनाढ्य सामुदायिक भवन में आयोजित विचार गोष्ठी के दौरान मंच पर विचार व्यक्त करते मुख्य वक्ता बलिराम और विवेकानंद नगर संघचालक सत्यनारायण काष्ट।
कोटा के महावीर नगर प्रथम स्थित सनाढ्य सामुदायिक भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विवेकानंद नगर द्वारा मंगलवार को एक प्रमुख विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सामाजिक सद्भावना प्रमुख बलिराम उपस्थित रहे, जबकि मंच पर विवेकानंद नगर संघचालक सत्यनारायण काष्ट मौजूद थे। गोष्ठी का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगीत 'वन्देमातरम' के गायन के साथ हुआ।
संघ का उद्देश्य और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
मुख्य वक्ता सामाजिक सद्भावना प्रमुख बलिराम ने अपने संबोधन में कहा, "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का निर्माण हिन्दू समाज को शक्ति संपन्न बनाने के लिए हुआ है।" उन्होंने आगे कहा कि हिंदुस्तान हिन्दू राष्ट्र है, जिसे लेकर आज कई भ्रम व भ्रांतियां फैलाई गई हैं। उन्होंने इस स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए कहा, "दुर्भाग्य से हमें जो गुलामी झेलनी पड़ी, जिसमे अंग्रेजों ने हमारे गौरवपूर्ण इतिहास को ही विकृत कर दिया।" इससे समाज के मन में गहरा भ्रम पैदा हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में धर्म, संस्कृति, समाज और राष्ट्र को लेकर इतने भ्रम पैदा किये गए कि भारतीय अपनी स्वयं की पहचान ही भूल गए।
राष्ट्र एक सांस्कृतिक चेतना
गोष्ठी में हिंदुत्व की परिभाषा पर जोर देते हुए बलिराम ने कहा, "हिंदुत्व ही हमारे देश का राष्ट्रित्व है।" उन्होंने बताया कि राष्ट्रीयता दुनिया के अन्य देशों में भिन्न हो सकती है, लेकिन भारत में राष्ट्रीयता ही हिंदुत्व है और हिंदुत्व ही राष्ट्रीयता है। जहाँ पश्चिमी विचारों में देश को 'नेशन' या 'स्टेट थ्योरी' के रूप में देखा जाता है, वहीं भारत में राष्ट्र की संकल्पना पूर्णतः भिन्न है। उन्होंने कहा, "यहां राष्ट्र एक सांस्कृतिक चेतना है।" उन्होंने विस्तार से बताया कि जब दुनिया के अन्य देशों ने आँखें भी नहीं खोली थीं, तब भारत में वेद पढ़े जाते थे। भारतीय संस्कृति ही राष्ट्र है और राष्ट्र ही संस्कृति है। हमारी संस्कृति में सभी तरह की पूजा पद्धतियाँ समाहित हैं और इसमें ही नर से नारायण बनने की प्रक्रिया है। हिन्दू एवं हिंदुत्व हमारे यहाँ सांस्कृतिक वाचक हैं। "जो मानव समूह इसको राष्ट्र मानेगा वह हिन्दू है।" हिन्दू समाज का सम्बन्ध किसी जाति या धर्म विशेष से नहीं है।
आत्म-गौरव और सामाजिक परिवर्तन
बलिराम ने राष्ट्र व भारतीय संस्कृति पर चर्चा करते हुए समाज को अपने खोये हुए गौरव को पुनः प्राप्त करने के लिए 'स्व' को जानने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने आह्वान किया कि सभी को 'पंच परिवर्तन' के माध्यम से समाज परिवर्तन में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में संघचालक सत्यनारायण काष्ठ ने शहर के सभी प्रमुख एवं प्रबुद्धजनों तथा मातृशक्ति का आभार व्यक्त किया।

Pratahkal Bureau
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