रिद्धि-सिद्धि नगर में गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के शिष्य गणधर मुनि श्री 108 विवर्धन सागर जी महाराज ने प्रवचन में तप की महत्ता बताते हुए कहा कि तप दो प्रकार का होता है—बाह्य तप और आंतरिक तप। उन्होंने कहा कि तप के माध्यम से व्यक्ति शरीर के प्रति ममत्व का त्याग कर आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ता है।

मुनि श्री ने बाह्य तप के छह अंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि अनशन, उनोदरी, वृत्ति-परिसंख्यान, विविक्त शय्यासन, रस-परित्याग और कायक्लेश बाह्य तप के प्रमुख स्वरूप हैं। वहीं प्रायश्चित, विनय, वैयावृत्य, स्वाध्याय, व्युत्सर्ग और ध्यान आंतरिक तप के अंग हैं।

उन्होंने कहा कि शरीर के प्रति ममत्व छोड़ना अत्यंत आवश्यक है। जब तक व्यक्ति शरीर और सांसारिक विषयों के प्रति आसक्ति से ऊपर नहीं उठता, तब तक संयमपूर्वक तप की साधना करना कठिन है।

मुनि श्री ने स्पष्ट किया कि तप केवल शारीरिक कष्ट सहने का नाम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आंतरिक परिवर्तन की साधना है। सच्ची श्रद्धा और सम्यक भाव के बिना किया गया तप अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर सकता। तप में बाहरी अनुशासन के साथ मन की निर्मलता और आत्मचिंतन भी आवश्यक है।

मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि कार्यक्रम में पाद प्रक्षालन का सौभाग्य महावीर कुमार, पंकज-वंदना, गीतांश एवं मानस खटोड़ (गढ़हाला) परिवार को प्राप्त हुआ।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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