RGHS बकाया भुगतान: जयपुर में दवा विक्रेताओं का प्रदर्शन आज, कोटा से कूच
राजस्थान के दवा विक्रेता महीनों से लंबित भुगतान और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग को लेकर जयपुर स्थित स्वास्थ्य भवन पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे।

राजस्थान स्वास्थ्य योजना (RGHS) के तहत बकाया भुगतान की मांग को लेकर जयपुर में एकत्रित हुए प्रदेशभर के दवा विक्रेता। सोमवार को कोटा समेत विभिन्न जिलों से केमिस्ट अपनी मांगों का मांगपत्र सौंपने पहुंचे।
राजस्थान सरकार की स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) से संबद्ध दवा व्यवसायियों ने महीनों से लंबित पड़े अपने बकाया भुगतानों को लेकर निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति के तत्वावधान में आयोजित इस प्रदेशव्यापी आंदोलन की लौ कोटा तक पहुँच गई है, जहाँ से बड़ी संख्या में दवा व्यवसायी सोमवार सुबह 9 बजे जयपुर के लिए कूच करेंगे। लंबे समय से अटके भुगतान और सरकारी उदासीनता के विरुद्ध आक्रोशित केमिस्ट जयपुर स्थित अशोक स्वास्थ्य भवन के समक्ष एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
प्रदेश अध्यक्ष विवेक विजयवर्गीय ने वर्तमान स्थितियों पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि दवा विक्रेता लंबे समय से अपने जायज भुगतानों के लिए संघर्षरत हैं, परंतु शासन स्तर पर अब तक कोई ठोस या सकारात्मक पहल नहीं की गई है। इस अनिश्चितता के चलते व्यवसायियों में पनप रहा नाराजगी का ज्वार अब जयपुर के अशोक स्वास्थ्य भवन पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के रूप में दिखाई देगा। समिति के अनुसार, प्रदेशभर से लगभग एक हजार से अधिक दवा विक्रेता राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के सीईओ के समक्ष उपस्थित होकर अपनी मांगों का मांगपत्र प्रस्तुत करेंगे। यह पूरा आंदोलन लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर रहकर पूर्णतः शांतिपूर्ण तरीके से संचालित किया जाएगा।
दवा व्यवसायियों की मुख्य मांगों में महीनों से लंबित भुगतान का तत्काल निस्तारण सबसे प्रमुख है। इसके साथ ही, भविष्य के लिए एक पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान प्रक्रिया लागू करने हेतु निश्चित समय सीमा तय करने की मांग की गई है। व्यवसायी रिजेक्ट और पेंडिंग पड़े बिलों की स्पष्ट जानकारी भी चाहते हैं, ताकि व्यवस्था में व्याप्त अनिश्चितता का अंत हो सके और कार्यप्रणाली में सुदृढ़ पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
कोटा से होने वाला यह कूच और जयपुर का यह सामूहिक प्रदर्शन न केवल दवा विक्रेताओं की आर्थिक सुरक्षा के प्रश्न को उठाता है, बल्कि आरजीएचएस योजना की सुचारू निरंतरता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। दवा विक्रेताओं की यह हुंकार आगामी समय में सरकार की कार्यप्रणाली और केमिस्टों के हितों के संरक्षण की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित होगी।

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