कोटा। राजस्थान की शैक्षणिक नगरी कोटा के गलियारों में शनिवार को राजनीति का एक ऐसा रूप देखने को मिला, जिसने राहगीरों और प्रशासन दोनों को ठिठकने पर मजबूर कर दिया। नगर निगम क्षेत्र की चरमराती व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से उपजे जन-आक्रोश को स्वर देते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कड़ाके की ठंड के बीच अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। रंगबाड़ी सब्जी मंडी चौराहे पर आयोजित इस अनोखे 'अर्धनग्न सद्बुद्धि यज्ञ' ने न केवल राहगीरों का ध्यान खींचा, बल्कि प्रदेश की सियासत में विकास के दावों पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व देहात कांग्रेस कमेटी के गणेश नगर मंडल अध्यक्ष चेतन सिंह सोलंकी कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का मुख्य निशाना स्थानीय विधायक और प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर रहे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला यह इलाका आज उपेक्षा के अंधेरे में डूबा हुआ है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ किया, जिसका उद्देश्य सरकार और नगर निगम प्रशासन को कुंभकर्णी नींद से जगाना था।

चेतन सिंह सोलंकी ने तीखे लहजे में कहा कि क्षेत्र की सड़कें छलनी हो चुकी हैं और नालियां पूरी तरह जर्जर हैं। जलभराव के कारण बस्तियों में बीमारियां पैर पसार रही हैं और सरकारी स्कूलों की इमारतें इतनी असुरक्षित हैं कि किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इस बदहाली की पूरी जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री, नगर निगम और वर्तमान राज्य सरकार की नाकामी पर है। प्रदर्शनकारियों ने विशेष रूप से हरिओम नगर, रंगबाड़ी, बंधा-धर्मपुरा, आंवली-रोजड़ी और नयागांव का जिक्र किया, जहां हजारों परिवार आज भी अपने पट्टों के लिए दर-दर भटक रहे हैं। आरोप लगाया गया कि कांग्रेस शासन के दौरान शुरू हुई पट्टा वितरण प्रक्रिया को भाजपा सरकार ने आते ही ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

राजनीतिक प्रहार करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि चुनाव के समय केवल धार्मिक भावनाओं और ध्रुवीकरण के आधार पर वोट बटोरे जाते हैं, लेकिन धरातल पर विकास शून्य है। वर्षों से भाजपा के विधायक और पार्षद होने के बावजूद जनता डेंगू जैसी बीमारियों और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण लगने वाली चोटों से जूझ रही है। इस शक्ति प्रदर्शन में मोनू बना, धीरज नागर, अज्जू साल्वी, रंजीत पाठक, राजकुमार भोला, लटूरलाल महावर, वेदप्रकाश गुजर, कमलेश पंकज, अजयराज सोलंकी, प्रताप सिंह हाड़ा, जुल्फिकार अली और नंदा राठौर सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

प्रदर्शन के अंत में शिक्षा मंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें चेतावनी दी गई कि यदि जनसमस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा। कोटा की सड़कों पर हुआ यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि उन हजारों नागरिकों की दबी हुई आवाज था जो विकास की बाट जोह रहे हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'सद्बुद्धि यज्ञ' से मिली आध्यात्मिक और राजनीतिक चुनौती का जवाब किस प्रकार देता है।

Pratahkal Newsroom

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