कोटा, 17 दिसंबर। भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा मनरेगा योजना से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम देश के करोड़ों गरीब और मजदूरों से रोजगार की कानूनी गारंटी छीनने के समान है। मनोज दुबे ने कहा, “मनरेगा का नाम बदलकर भाजपा ने साबित कर दिया कि उनके आदर्श ‘गांधी नहीं, गोडसे हैं।’”

मनोज दुबे ने बताया कि मनरेगा महात्मा गांधी के ग्राम-स्वराज के सपने का जीवंत रूप है और करोड़ों ग्रामीणों के जीवन का सहारा है। कोविड काल में यह योजना आर्थिक सुरक्षा का कवच साबित हुई। गरीब, मजदूर और किसानों की घटती आमदनी और बढ़ती महंगाई के बीच मनरेगा करोड़ों लोगों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का प्रमुख स्त्रोत रही है।

उन्होंने चेतावनी दी कि मोदी सरकार द्वारा पेश किया गया मनरेगा विधेयक गरीब मजदूरों के रोजगार के अधिकार पर सीधा हमला है। इस विधेयक के तहत योजना का पूरा नियंत्रण केंद्र के पास रहेगा, जबकि राज्यों को 40% तक का खर्च उठाना होगा। इससे मजदूर काम से वंचित हो सकते हैं और ग्राम सभाओं के अधिकारों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मनोज दुबे ने इसे जनविरोधी, गरीब-विरोधी और संविधान-विरोधी बिल करार दिया और कहा कि इसका हर मोर्चे पर विरोध किया जाएगा।

मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों गरीबों के लिए रोज़गार का कानूनी अधिकार है। महात्मा गांधी के नाम को योजना से हटाने का प्रयास न केवल उनके विचारों पर हमला है, बल्कि ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों को भी चुनौती देता है। मनोज दुबे का यह बयान केंद्र सरकार की योजनाओं और ग्रामीण रोजगार के भविष्य पर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।

Pratahkal Bureau

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