143 वर्षों का मौन भंग: रामपुरा पार्श्वनाथ मंदिर में पहली बार ध्वजा महोत्सव का ऐतिहासिक आयोजन
क्या कोटा के 143 साल पुराने रामपुरा पार्श्वनाथ मंदिर में फिर से गूंजेगी भक्ति की अनकही गाथा? एक सदी से अधिक के इंतजार के बाद मंदिर पर फहराएगी धर्मध्वजा। तीन दिवसीय इस ऐतिहासिक महोत्सव की भव्य तैयारियों और भक्ति के महासंगम की एक विस्तृत रिपोर्ट।

कोटा के रामपुरा स्थित प्राचीन बड़ा उपासरा श्री सिद्धेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर में 143 वर्षों बाद ध्वजा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
राजस्थान के कोटा स्थित रामपुरा के प्राचीन बड़ा उपासरा जैन मंदिर में इतिहास के पन्ने फिर से जीवंत होने जा रहे हैं। नगर की धार्मिक विरासत को संजोए हुए श्री सिद्धेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर में 143 वर्षों के दीर्घकाल के उपरांत पहली बार ध्वजा महोत्सव का भव्य आयोजन होने जा रहा है। यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समागम है, बल्कि आस्था और ऐतिहासिक गौरव का एक ऐसा अनूठा संगम है, जो शहर के वातावरण को भक्ति के रंग में सराबोर करने के लिए तैयार है।
महोत्सव की व्यापक तैयारियों के बीच मूर्ति श्री पार्श्वनाथ ट्रस्ट कोटा की अध्यक्ष देवयानी शाह ने बताया कि 19 से 21 जून तक तीन दिवसीय आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई है। महोत्सव का विधिवत शुभारंभ 19 जून को जिनालय में विराजमान प्रभु की प्रतिमाओं के अष्टादश अभिषेक एवं विशेष पूजन के साथ होगा। इसी क्रम में, उसी दिन रात्रि साढ़े आठ बजे रामपुरा बाजार के पीपल चौक के समीप भक्ति संगीत की रसास्वादन कराने के लिए भीलवाड़ा की प्रख्यात भजन गायिका निशा हिंगड़ की भजन संध्या का आयोजन किया गया है।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में 20 जून का दिन आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहेगा। इस दिन सिद्धेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर में पारस पंचकल्याणक महापूजन का आयोजन किया जाएगा, जिसके पश्चात मंदिर के शिखर पर ध्वजदंड स्थापना का पुनीत कार्य संपन्न होगा। महोत्सव का भव्य समापन 21 जून को होगा, जब प्रातःकाल नगर में एक विशाल वरघोड़ा निकाला जाएगा। यह शोभायात्रा रामपुरा, आर्य समाज मार्ग और गांधी चौक जैसे प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंचेगी। धार्मिक जयघोषों और मंगल वाद्ययंत्रों की ध्वनि के बीच विधिवत ध्वज पूजन संपन्न होगा और तत्पश्चात धर्मध्वजा को मंदिर के शिखर पर आरोहित किया जाएगा।
यह आयोजन जैन समुदाय के लिए अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण क्षण है। 143 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बाद मंदिर के शिखर पर ध्वज का लहराना, न केवल परंपरा का पुनरुद्धार है, बल्कि यह कोटा की सांस्कृतिक समृद्धि का भी परिचायक है। इस ऐतिहासिक महोत्सव में जैन समाज के हजारों श्रद्धालुओं के साथ शहर के प्रबुद्ध नागरिक भी साक्षी बनेंगे, जो इस आयोजन को कोटा के धार्मिक इतिहास में एक अविस्मरणीय पृष्ठ के रूप में दर्ज करेगा।

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