तालाबों से अतिक्रमण हटाएं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा: मनोज दुबे
तालाब बचाओ संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष मनोज दुबे ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर 'वंदे गंगा अभियान' की सफलता के लिए अतिक्रमण मुक्त जल स्रोतों की मांग की।

तालाब बचाओ संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष मनोज दुबे, जिन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 'वंदे गंगा - जल संरक्षण जन अभियान' के तहत प्रदेश के सभी तालाबों, कुओं और बावड़ियों से पूर्ण रूप से अतिक्रमण हटाने की मांग की है।
तालाब बचाओ संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष मनोज दुबे ने तालाबों से अतिक्रमण हटाए जाने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन भेजा है। मनोज दुबे ने कहा कि गंगा दशहरा के पावन अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ‘वंदे गंगा - जल संरक्षण जन अभियान’ का शुभारंभ अत्यंत सराहनीय एवं राजस्थान के लिए एक ऐतिहासिक पहल है, लेकिन इस अभियान की पूर्ण सफलता के लिए तालाबों से पूर्ण रूप से अतिक्रमण हटाना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि एक ओर विभिन्न स्थानों पर आज भी लाखों लोग एक-एक बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर तालाबों, नदियों, कुओं, बावड़ियों आदि की सफाई के अभाव में एवं अतिक्रमणों के कारण बरसात का पानी बर्बाद हो जाता है, जौ की जल संरक्षण मे सबसे बड़ी बाधा का कारण है।
मनोज दुबे ने आगे कहा कि ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत गांव-गांव एवं शहरों में सभी कुएं, बावड़ी, तालाब, जोहड़ जैसे जल स्रोतों की पूर्ण रूप से सफाई होनी चाहिए तथा इसके साथ ही तालाबों पर हो रहे अतिक्रमणों को हटाया जाए और इन पर कड़ाई से पूर्ण रूप से रोक लगाई जाए, ताकि वर्षा जल का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि जल ही जीवन का आधार है और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य हेतु जल एवं पर्यावरण संरक्षण सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे गंगा’ जल संरक्षण जन अभियान इसी संकल्प को जन आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन तालाबों, कुएं, बावड़ियां आदि जो जल संरक्षण के प्रमुख स्रोत हैं, उन्हें पूर्ण रूप से अतिक्रमण मुक्त किए बिना इस अभियान की सार्थकता संभव नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि तालाबों, नदियों, कुओं, बावड़ियों और अन्य जल स्रोतों को स्वच्छ बनाने तथा संरक्षित करने में सभी को अपना योगदान देना चाहिए। व्यापक स्तर पर इनकी सफाई एवं अतिक्रमण से मुक्ति आवश्यक है, जिससे बरसात के दिनों में जल संरक्षण हो सके, शहर व ग्रामीण क्षेत्र बाढ़ मुक्त हों और हर वर्ष होने वाली जन-धन हानि पर भी रोक लग सके।

Pratahkal Bureau
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