श्री पुण्योदय अतिशय क्षेत्र नसियां जी दादाबाड़ी में 20 अगस्त का दिन जैन समाज के इतिहास में दो ऐतिहासिक अध्याय जोड़ने जा रहा है। चातुर्मासरत ज्येष्ठ-श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण मुनि शिरोमणि श्री 108 योगसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में होने वाला जैनेश्वरी मुनि दीक्षा समारोह राजस्थान में पहली बार आचार्य भगवन्त श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की संघ-परंपरा से मुनि दीक्षा का साक्षी बनेगा। साथ ही मुनिश्री 108 योगसागर जी महाराज के कर-कमलों से पहली बार मुनि दीक्षा संस्कार संपन्न होगा।

चातुर्मास कमेटी के संयोजक हुकम जैन काका और नसिया जी मंदिर के अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ ने बताया कि राजस्थान की धरती पर पहली बार संत शिरोमणि आचार्य भगवन्त श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की संघ-परंपरा से मुनि दीक्षा संपन्न होने जा रही है। दूसरी ऐतिहासिक उपलब्धि यह है कि मुनिश्री 108 योगसागर जी महाराज के कर-कमलों से पहली बार मुनि दीक्षा संस्कार होगा। इन दोनों उपलब्धियों के कारण यह समारोह धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक महत्व भी रखता है।

चातुर्मास कमेटी के संयोजक हुकम जैन काका, नसिया जी मंदिर के अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ और महामंत्री महेन्द्र कासलीवाल ने बताया कि मुनिश्री योगसागर जी महाराज इससे पहले रक्षाबंधन के पावन अवसर पर रहली में छह ऐलक दीक्षाएं प्रदान कर चुके हैं। अब उनके सान्निध्य और कर-कमलों से पहली मुनि दीक्षा होने जा रही है। इस दुर्लभ अवसर को लेकर कोटा, हाड़ौती के साथ देशभर के जैन श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।

समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। आयोजन स्थल पर तीन वाटरप्रूफ मंडप एवं पांडाल तैयार किए जा रहे हैं। लगभग 380 फीट × 54 फीट, यानी करीब 20,500 वर्ग फीट के इन मंडपों में लगभग 6,800 श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था रहेगी। भोजन व्यवस्था के लिए भी बड़े वाटरप्रूफ पांडाल तैयार किए गए हैं, ताकि मौसम प्रतिकूल होने की स्थिति में श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। विशिष्ट अतिथियों, आगंतुकों एवं त्यागी-व्रतियों के लिए पृथक भोजन व्यवस्था की गई है। महिलाओं के लिए वातानुकूलित हॉल की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

चातुर्मास कमेटी के संयोजक हुकम जैन काका ने बताया कि जैनेश्वरी मुनि दीक्षा का यह अवसर कोटा और हाड़ौती के साथ राजस्थान तथा देशभर के जिनभक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन गया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के प्रत्यक्ष साक्षी बनने के लिए कोटा पहुंच रहे हैं। जो श्रद्धालु समारोह में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हो सकेंगे, उनके लिए सुधाकलश के माध्यम से लाइव प्रसारण की व्यवस्था की जा रही है। इसके जरिए देश के विभिन्न क्षेत्रों में बैठे श्रद्धालु भी इस पुण्यमय अवसर के दर्शन कर सकेंगे।

परम पूज्य क्षुल्लक श्री 105 संयमसागर जी महाराज संत शिरोमणि आचार्य भगवन्त श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के व्यक्तित्व, ज्ञान, करुणा और आध्यात्मिक जीवन से गहराई से प्रभावित एवं प्रेरित रहे हैं। आचार्यश्री के आदर्शों और आत्मकल्याण की प्रेरणा से संयम-पथ पर आगे बढ़ने का उनका संकल्प जैन समाज के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है।

महामंत्री महेन्द्र कासलीवाल ने बताया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए यातायात और पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है। चार पहिया वाहनों तथा बाहर से आने वाली श्रद्धालुओं की बसों की पार्किंग दादाबाड़ी पुलिस थाने के पास चिल्ड्रन स्कूल के बाहर एवं राठौर छात्रावास में रहेगी। पार्किंग स्थल से मंदिर परिसर तक की दूरी लगभग पांच मिनट की पैदल दूरी है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निःशुल्क ई-रिक्शा सेवा उपलब्ध रहेगी। मंदिर के आसपास चार पहिया वाहन खड़ा करना निषिद्ध रहेगा। दोपहिया वाहनों के लिए बॉयज हॉस्टल परिसर में पार्किंग की व्यवस्था की गई है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से यातायात व्यवस्था में सहयोग करने और निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही उपयोग करने की अपील की है।

पूज्य 105 क्षुल्लक श्री संयम सागर जी महाराज का पूर्व नाम रत्नाकर जी है। उनके पिता का नाम श्री अप्पासाहेब दुर्गे और मां का नाम सौ. त्रिशला देवी है। उनका जन्म 15-12-1987 को मोलवाड़, जिला-बेलगाम (कर्नाटक) में हुआ। उन्होंने 9वीं तक शिक्षा प्राप्त की है।

धार्मिक जीवन में उन्होंने 22-4-2003 को किन्नूर, कर्नाटक में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया। ब्रह्मचर्य व्रत गुरु के रूप में वे आचार्य श्री जी से आचार्यश्री के व्यक्तित्व से प्रभावित रहे हैं। वर्ष 2003 के चातुर्मास चिपरी में उन्होंने दूसरी प्रतिमा व्रत और वर्ष 2004 के चातुर्मास में तीसरी प्रतिमा व्रत लिया। 25-4-2008 को सुखसागर धाम, कलभ्म्बी में जिन पंचकल्याणक के दौरान उन्हें क्षुल्लक दीक्षा प्राप्त हुई। उनके क्षुल्लक दीक्षा गुरु परम् पूज्य 108 ज्येष्ठ मुनि श्री सुखसागर जी महाराज हैं।

दीक्षा के बाद उन्होंने एक वर्ष मौन पालन किया। वे मराठी, कन्नड़ और हिन्दी सहित अनेक भाषाओं के ज्ञाता हैं। 20 अगस्त को होने वाला मुनि दीक्षा संस्कार इन धार्मिक और आध्यात्मिक यात्राओं के बीच राजस्थान में पहली बार विद्यासागर जी महाराज की संघ-परंपरा से मुनि दीक्षा तथा मुनिश्री योगसागर जी महाराज के कर-कमलों से प्रथम मुनि दीक्षा संस्कार के रूप में दर्ज होने जा रहा है।

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