राजस्थान में अचानक हुए मौसम परिवर्तन और बेमौसम बारिश ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने इस प्राकृतिक आपदा से खेतों में खड़ी और कटकर पड़ी फसलों को हुए भारी नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राजस्थान सरकार से तत्काल उचित मुआवजा देने की पुरजोर मांग की है। कोटा में जारी एक बयान में दुबे ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में खेतों में गेहूं, लहसुन और चने की फसलें या तो पूरी तरह तैयार खड़ी थीं या फिर कटाई के बाद खेतों में ही रखी हुई थीं, लेकिन इस बिन मौसम की बरसात ने दोनों ही स्थितियों में किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

मनोज दुबे ने फसलों की बर्बादी का विवरण देते हुए कहा कि बेमौसम बारिश ने किसानों पर कहर ढा दिया है, जिससे न केवल उत्पादन प्रभावित होगा बल्कि फसलों की गुणवत्ता पर भी बेहद बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने आगाह किया कि गेहूं की फसल चाहे खेत में खड़ी हो या कटकर पड़ी हो, भीगने के कारण उसकी क्वालिटी खराब होना निश्चित है। इसी प्रकार लहसुन और चने की फसलों में भी भारी खराबी आने की आशंका है, जिससे बाजार में किसानों को उचित दाम नहीं मिल पाएंगे। कटाई के इस सबसे महत्वपूर्ण समय में मौसम का यह प्रतिकूल उतार-चढ़ाव किसानों के लिए एक बड़ी आफत बनकर सामने आया है।

किसान नेता ने सरकार को चेताते हुए कहा कि यह बारिश केवल फसलों की कटाई पर संकट नहीं है, बल्कि यह किसानों की साल भर की मेहनत और उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा प्रहार है। गुणवत्ता और बाजार कीमतों में होने वाली संभावित गिरावट को देखते हुए मनोज दुबे ने राजस्थान सरकार से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में अविलंब विशेष गिरदावरी करवाई जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासन बिना किसी देरी के फसल खराबे का सटीक आकलन करे और पीड़ित किसानों को सम्मानजनक मुआवजा राशि प्रदान करे ताकि उन्हें इस आकस्मिक संकट से उबारा जा सके।

Pratahkal Hub

Pratahkal Hub

प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"

Next Story