राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय: वित्तीय विवाद पर कर्मचारियों और शिक्षकों ने खोला मोर्चा
राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा में लेखाधिकारी के विरुद्ध कर्मचारियों और शिक्षकों का विरोध तेज हो गया है। वित्तीय कार्यों में देरी और कार्यप्रणाली को लेकर राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की गई है। क्या सुधरेगा आरटीयू का कामकाज?

राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा में लेखाधिकारी की कार्यप्रणाली के विरोध में ज्ञापन सौंपते कर्मचारी और संकाय सदस्य। इस प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक और अशैक्षणिक कर्मचारी संघ के पदाधिकारी शामिल रहे।
कोटा। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू), कोटा के प्रशासनिक गलियारों में उपजा असंतोष अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है। विश्वविद्यालय में वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों के संचालन को लेकर उपजे गतिरोध के चलते विश्वविद्यालय के अशैक्षणिक कर्मचारी संघ और संकाय सदस्यों ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को कर्मचारियों और शिक्षकों ने अलग-अलग ज्ञापन प्रेषित कर राज्यपाल एवं कुलाधिपति से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यह विरोध मुख्य रूप से लेखाधिकारी शादाब अंसारी की कार्यप्रणाली, उनके व्यवहार और वित्तीय फाइलों के निस्तारण में की जा रही कथित देरी को लेकर दर्ज किया गया है।
अशैक्षणिक कर्मचारी संघ द्वारा प्रेषित ज्ञापन में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि विश्वविद्यालय के कर्मचारियों से जुड़े महत्वपूर्ण मामले, जैसे चयनित वेतनमान 9-18-27, विभागीय पदोन्नति, एसीपी और वेतन विसंगति जैसे वित्तीय मसले लंबे समय से लंबित हैं। संघ का आरोप है कि लेखाधिकारी द्वारा इन मामलों में अनावश्यक अड़चनें पैदा की जा रही हैं, जिसके कारण कर्मचारियों को न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि वे मानसिक तनाव के दौर से भी गुजर रहे हैं। संघ ने स्पष्ट किया है कि लेखाधिकारी का व्यवहार और कार्यशैली विश्वविद्यालय के कार्य परिवेश के प्रतिकूल है।
इस विवाद में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य भी पीछे नहीं रहे हैं। संकाय सदस्यों ने कुलगुरु और संभागीय आयुक्त के माध्यम से राज्यपाल को भेजे गए ज्ञापन में प्रशासनिक बाधाओं पर कड़ी आपत्ति जताई है। शिक्षकों का तर्क है कि लेखाधिकारी द्वारा वित्तीय कार्यों में की जा रही देरी के कारण शैक्षणिक गतिविधियां प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रही हैं। प्रयोगशालाओं के रखरखाव, उपकरणों की खरीद और शिक्षकों के वेतन निर्धारण जैसे बुनियादी कार्यों में बाधा आने से पठन-पाठन पर विपरीत असर पड़ रहा है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विभिन्न समितियों की बैठकों से लेखाधिकारी की अनुपस्थिति के कारण महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों के क्रियान्वयन में भारी देरी हो रही है।
प्रशासनिक असंतोष के अलावा, विश्वविद्यालय की साख पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई है। ज्ञापनों में आरोप है कि विश्वविद्यालय के आंतरिक विषयों और सूचनाओं को मीडिया में इस तरह से प्रस्तुत किया जा रहा है जिससे संस्थान की सार्वजनिक छवि धूमिल हो रही है। इस स्थिति से विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल, कर्मचारियों और शिक्षकों ने राज्यपाल से मांग की है कि लेखाधिकारी शादाब अंसारी के विरुद्ध निष्पक्ष जांच की जाए और विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन के लिए त्वरित प्रशासनिक सुधार किए जाएं। इस घटनाक्रम ने पूरे परिसर में चर्चा का माहौल बना दिया है और अब सबकी निगाहें राजभवन से आने वाले आगामी निर्देशों पर टिकी हैं।

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