कोटा में वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा द्वारा आयोजित प्री-टीचर एजुकेशन टेस्ट (PTET)-2026 की प्रवेश प्रक्रिया विवादों के घेरे में आ गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन और समन्वयक कार्यालय पर आरोप है कि काउंसलिंग के दौरान नियमों की अलग व्याख्या करते हुए सैकड़ों बी.टेक (इंजीनियरिंग) डिग्री धारक अभ्यर्थियों को बीएड पाठ्यक्रम में प्रवेश से वंचित कर दिया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि पहले उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई, लेकिन काउंसलिंग के समय अचानक ‘विज्ञान और गणित में विशेषज्ञता प्रमाण पत्र’ (Specialization Certificate) की अनिवार्यता बताकर बाहर कर दिया गया। उनका दावा है कि इस स्थिति के कारण काउंसलिंग प्रक्रिया समाप्त होने के बाद भी बीएड कॉलेजों में सैकड़ों सीटें खाली रह गई हैं।

बी.टेक अभ्यर्थियों और शिक्षाविदों ने विशेषज्ञता प्रमाण पत्र की मांग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से बी.टेक या बी.ई. करने वाले छात्र चार से आठ सेमेस्टर तक अनिवार्य रूप से उच्च स्तरीय इंजीनियरिंग मैथमेटिक्स, फिजिक्स और केमिस्ट्री का अध्ययन करते हैं। तकनीकी शिक्षा का पूरा ढांचा विज्ञान और गणित पर आधारित है। ऐसे में एनसीटीई (NCTE) रेगुलेशंस, 2014 के नाम पर अलग से ‘विशेषज्ञता प्रमाण पत्र’ मांगना पूरी तरह हास्यास्पद और अतार्किक है। उनका कहना है कि जब बी.टेक की डिग्री स्वयं इस बात का प्रमाण है कि छात्र ने विज्ञान और गणित का अध्ययन किया है, तब अतिरिक्त कागजी औपचारिकता की आवश्यकता समझ से परे है।

अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि PTET-2026 के आवेदन और परीक्षा के दौरान उन्हें किसी भी स्तर पर अयोग्य नहीं ठहराया गया। उन्होंने महीनों तैयारी की, परीक्षा दी और मेरिट सूची में स्थान भी प्राप्त किया। इसके बावजूद काउंसलिंग के समय इस शर्त को लागू कर योग्य तकनीकी स्नातकों को प्रवेश प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि इससे न केवल उनका समय और धन व्यर्थ हुआ, बल्कि उनके करियर और मानसिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

इस पूरे मामले को अभ्यर्थियों ने प्रशासनिक विफलता भी बताया है। उनका कहना है कि एक ओर योग्य बी.टेक अभ्यर्थियों को प्रवेश से वंचित किया गया, वहीं दूसरी ओर काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी राजस्थान के विभिन्न शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों में बड़ी संख्या में सीटें रिक्त रह गईं। उनका आरोप है कि सरकार जहां युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और शिक्षक-छात्र अनुपात सुधारने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर योग्य और तकनीकी रूप से सक्षम युवाओं को नियमों के फेर में उलझाकर सीटें खाली छोड़ दी गईं।

परेशान बी.टेक अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार, शिक्षा मंत्री और पीटीईटी समन्वयक से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि इस शर्त को तत्काल शिथिल किया जाए और बी.टेक की अंकतालिकाओं को ही विज्ञान और गणित के अध्ययन का पर्याप्त आधार मानते हुए रिक्त सीटों पर इन अभ्यर्थियों को प्रवेश का अंतिम अवसर दिया जाए। उनका कहना है कि इससे एक ओर युवाओं का शैक्षणिक वर्ष बर्बाद होने से बचेगा, वहीं दूसरी ओर राज्य के बीएड कॉलेजों की रिक्त सीटें भी भर सकेंगी।

Pratahkal Bureau

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