राजस्थान ऊर्जा नीति पर बरसे शांति धारीवाल, बिजली एमओयू और घाटे पर उठाए सवाल
पूर्व मंत्री धारीवाल ने विधानसभा में 2,570 करोड़ के घाटे, अधूरे कृषि कनेक्शन और सौर ऊर्जा ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को लेकर सरकार को घेरा।

राजस्थान विधानसभा में बजट सत्र के दौरान पूर्व मंत्री शांति धारीवाल राज्य की ऊर्जा नीति में खामियां और बिजली कंपनियों के बढ़ते घाटे पर वक्तव्य देते हुए।
जयपुर/कोटा। विधानसभा में पूर्व मंत्री विधायक शांति धारीवाल ने राज्य सरकार की ऊर्जा नीति और परियोजनाओं को लेकर जमकर हमला बोला। धारीवाल ने कहा कि "सरकार बड़े-बड़े एमओयू और लक्ष्यों का दावा कर रही है, लेकिन उत्पादन, वितरण और पारदर्शिता के मोर्चे पर स्थिति चिंताजनक है।" उन्होंने आरोप लगाया कि ऊर्जा क्षेत्र में घोषणाएं ज्यादा और धरातल पर काम बेहद कम हुआ है।
एमओयू का अंबार और करोड़ों का घाटा
- 26 लाख 78 हजार करोड़ के 531 एमओयू साइन किए गए।
- धारीवाल ने कहा कि "राज्य की स्वयं की बिजली उत्पादन क्षमता में एक मेगावाट की भी वृद्धि नहीं हुई।"
- वर्ष 2024-25 में 11,770 करोड़ रुपए की बिजली खरीदी गई, जबकि बिक्री से 9,200 करोड़ ही प्राप्त हुए—यानी 2,570 करोड़ का घाटा।
उनका कहना था कि यदि राज्य अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाता तो टैरिफ का बोझ जनता पर नहीं आता।
कृषि कनेक्शन और पीएम सूर्यघर योजना पर सवाल
उन्होंने आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरा:
- 1 लाख 33 हजार नए कृषि कनेक्शन देने की घोषणा हुई, पर दिए गए केवल 64,597।
- पीएम सूर्यघर पोर्टल पर करीब 3 लाख आवेदन आए, जिनमें से केवल 1.24 लाख को स्वीकृति मिली।
- राज्य की 17 हजार की सब्सिडी भी केंद्र की 33 हजार की मंजूरी पर निर्भर है, जिससे उपभोक्ता को शुरुआत में पूरा खर्च उठाना पड़ रहा है और बैंक लोन भी आसान नहीं है।
कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर: सोलर उत्पादन बढ़ा, पर ग्रिड फेल
धारीवाल ने कहा कि राज्य में 23 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता स्थापित है, लेकिन ट्रांसमिशन क्षमता केवल 18.9 गीगावाट है। दिसंबर 2025 तक करीब 4,300 मेगावाट सौर क्षमता दिन में कर्टेल हो रही है क्योंकि ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर अपर्याप्त है। उन्होंने सवाल उठाया कि 2030 तक 125 गीगावाट नवीकरणीय लक्ष्य (90 GW सौर, 25 GW पवन, 10 GW जल/स्टोरेज) इस कमजोर ढांचे के साथ कैसे संभव होगा?
सोलर उपभोक्ताओं पर “दोहरी मार”
धारीवाल ने कहा कि "सोलर उपभोक्ताओं से 40 पैसे प्रति यूनिट इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी और फ्यूल सरचार्ज वसूला जा रहा है, जबकि वे अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दे रहे हैं।" एक्स्ट्रा यूनिट जमा करने के बजाय 3.26 रुपए प्रति यूनिट भुगतान किया जा रहा है, जबकि वही बिजली अधिक दर पर बेची जाती है। उन्होंने मांग की कि अतिरिक्त यूनिट उपभोक्ता के खाते में क्रेडिट की जाएं।
पंप स्टोरेज परियोजनाएं और टेंडर में गड़बड़ी के आरोप
8,720 मेगावाट क्षमता की आठ पंप स्टोरेज परियोजनाओं में अधिकांश अभी जमीन पर नहीं उतरी हैं। कहीं पानी की कमी तो कहीं जमीन आवंटन में अड़चन बताई गई। धारीवाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
- 3,200 मेगावाट खरीद अनुबंध के टेंडर विनियामक आयोग की मंजूरी से पहले जारी कर दिए गए।
- 456 करोड़ के सोलर टेंडर में फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर 46 करोड़ का एडवांस उठाया गया, लेकिन जांच में कोई अधिकारी दोषी नहीं ठहराया गया।
- 511 मेगावाट रूफटॉप सोलर परियोजना में अंतिम तिथि बढ़ाकर और जोधपुर व जयपुर जिलों के लिए न्यूनतम क्षमता की शर्त बदलकर बड़े कॉरपोरेट खिलाड़ियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया, जो आरटीपीपी एक्ट 2012 की भावना के खिलाफ है।
विदेशी कोयला और बढ़ती लागत
धारीवाल ने पूछा कि केंद्र के निर्देशानुसार 10% विदेशी कोयला खरीद की अनिवार्यता के तहत पिछले दो वर्षों में कितना कोयला आयात किया गया। कोयले में 5% बायोमास मिलाने से 5–7 पैसे प्रति यूनिट लागत बढ़ने का अनुमान है। उन्होंने सवाल किया कि यदि प्रतिदिन 45 करोड़ से अधिक का कोयला खर्च हो रहा है और लागत में 11–14 पैसे प्रति यूनिट बचत संभव है, तो क्या यूनिट दरें घटेंगी?
निष्कर्ष: “नीतियां नहीं, केवल दावे”
धारीवाल ने अंत में कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता, ग्रिड सुदृढ़ीकरण और दीर्घकालिक योजना की कमी है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा कि जब दिन में पर्याप्त सौर ऊर्जा उपलब्ध है और हजारों मेगावाट परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, तो फिर 24 घंटे महंगी बिजली खरीदने की योजना क्यों बनाई जा रही है।

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