मानसून की बेरुखी पर किसान महासभा की मांग, राजस्थान को अकालग्रस्त घोषित कर विशेष राहत पैकेज दे सरकार
राजस्थान में मानसून की कमी से खरीफ फसल पर संकट गहराने के बीच किसान महासभा ने हाड़ौती सहित प्रदेश को अकालग्रस्त घोषित कर विशेष राहत पैकेज की मांग उठाई।

तस्वीर में भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे मीडिया से बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को अलग-अलग पत्र लिखकर हाड़ौती संभाग सहित पूरे राजस्थान को अकालग्रस्त घोषित करने और किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मानसून की बेरुखी के कारण खरीफ की फसल पूरी तरह चौपट होने के कगार पर पहुंच गई है और किसानों को तत्काल राहत दिए जाने की आवश्यकता है।
मनोज दुबे ने कहा कि राजस्थान के 23 जिलों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। धान, सोयाबीन, उड़द, मूंग और मक्का सहित खरीफ की फसलें बारिश की कमी और कीट प्रकोप के कारण लगातार बर्बादी की ओर बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि धान, सोयाबीन और मक्का जैसी फसलें पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खराब हो रही हैं और इससे किसानों की कड़ी मेहनत पर संकट खड़ा हो गया है।
उन्होंने कहा कि किसानों ने महंगी खाद, बीज, सिंचाई, बिजली, डीजल-पेट्रोल, हकाई और बिजाई पर भारी खर्च कर दिन-रात मेहनत से फसल तैयार की, लेकिन बारिश की कमी ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। उनके अनुसार अकाल जैसे हालात किसानों को तबाही और बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं, जिससे किसान चिंतित और परेशान हैं।
मनोज दुबे ने कहा कि यह बेहद चिंता का विषय है कि आधा मानसून बीत जाने के बावजूद प्रदेश के कई जिलों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि लगभग 23 जिलों में अकाल जैसी स्थिति बन रही है तथा प्रदेश के 246 बांध खाली हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस स्थिति पर तत्काल ध्यान देना चाहिए। समय रहते मनुष्यों और मवेशियों के लिए पेयजल, गायों के लिए चारे तथा आम जनता के लिए रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार को इसे प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन को पूरी तरह सक्रिय करना चाहिए और राज्य स्तर पर समय पर वित्तीय स्वीकृतियां जारी करनी चाहिए, अन्यथा आगे चलकर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
मनोज दुबे ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि वह मौसम का इंतजार करने के बजाय अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करे। उन्होंने मांग की कि प्रभावित जिलों में विशेष गिरदावरी और फसल सर्वे कराया जाए, कीट नियंत्रण के लिए किसानों को दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएं, फसल बीमा दावों का त्वरित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए समय-सीमा घोषित की जाए तथा किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए विशेष राहत पैकेज जारी किया जाए।

Bhagvati Medatwal, Kota
नाम: भगवती मेड़तवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)
कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र
बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय
परिचय
भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।
