खाद वितरण की डिजिटल व्यवस्था पर रोक का स्वागत, पूरे देश में बंद करने की मांग
राजस्थान में डिजिटल खाद वितरण व्यवस्था पर रोक का मनोज दुबे ने स्वागत किया। डीएपी-यूरिया की ऑफलाइन व्यवस्था पूरे देश में लागू करने की मांग।

तस्वीर में पीले रंग की पगड़ी और फूलों की माला पहने एक व्यक्ति दिख रहे हैं।
राजस्थान में किसान विरोधी डिजिटल खाद वितरण की नई व्यवस्था पर रोक लगाए जाने के निर्णय का भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे किसानों के भारी विरोध का परिणाम बताते हुए खाद वितरण की नई डिजिटल व्यवस्था को पूरे देश में पूर्ण रूप से बंद करने की मांग की है।
किसान नेता मनोज दुबे ने कहा कि खाद वितरण की नई व्यवस्था किसानों के लिए भारी परेशानी का कारण बनी हुई थी। राजस्थान में इस पर रोक लगने से प्रदेश के किसानों को राहत मिलेगी। उन्होंने खाद की भारी किल्लत से परेशान किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी और यूरिया खाद उपलब्ध कराने की मांग भी की।
मनोज दुबे ने कहा कि सरकार की डिजिटल खाद वितरण की नई व्यवस्था बेहद जटिल है। किसान इस व्यवस्था को लेकर परेशान और चिंतित थे। यदि इसे नहीं बदला जाता तो किसानों के लिए खेती करना मुश्किल हो जाता। उन्होंने कहा कि खाद की ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था किसानों को खाद उपलब्ध कराने के बजाय संकट का माध्यम बन गई थी, जिसे वापस लेना अति आवश्यक था।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नई ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था खाद देने के बजाय किसानों को परेशान करने का जरिया बन गई थी। तकनीकी खामियां, सर्वर डाउन रहने की समस्या, 50 से 70 किलोमीटर दूर तक खाद केंद्र आवंटित होना और अंत में किसानों का खाली हाथ वापस लौटने को मजबूर होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति थी।
मनोज दुबे ने कहा कि खाद वितरण की नई व्यवस्था पर राजस्थान के साथ-साथ पूरे देश में कड़ाई से रोक लगनी चाहिए। उनके अनुसार खाद वितरण की नई डिजिटल व्यवस्था पूर्ण रूप से किसान विरोधी है, जिसका विरोध राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश में किसानों द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने राजस्थान में खाद वितरण की नई डिजिटल व्यवस्था को पुनः शुरू किया तो किसान कड़ा विरोध करेंगे।
ज्ञातव्य रहे कि भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने खाद वितरण की नई डिजिटल व्यवस्था का पुरजोर विरोध करते हुए पूरे राजस्थान में बड़े किसान आंदोलन की चेतावनी दी थी। अब राजस्थान में इस व्यवस्था पर रोक के निर्णय के बाद उन्होंने इसे किसानों के विरोध का परिणाम बताते हुए पूरे देश में डिजिटल व्यवस्था बंद कर पुराने ऑफलाइन सिस्टम से ही किसानों को डीएपी और यूरिया खाद उपलब्ध कराने की मांग दोहराई है।

Bhagvati Medatwal, Kota
नाम: भगवती मेड़तवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)
कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र
बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय
परिचय
भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।
