बजट और जमीनी हकीकत

"आज राजस्थान का बजट पेश हुआ, जो हर बार की तरह इस बार भी कागजों तक सिमटी हुई घोषणाओं का ही पुलिंदा है। पिछले बजट घोषणाओं का ही अभी तक वास्तविक रूप नही मिला फिर से घोषणाओं का नया झुनझुना दिया जा रहा है।"

  • बजट को लेकर हर वर्ग को उम्मीद थी, लेकिन वह भी निराशा में ही तब्दील हो गई।
  • कोटा को ज्यादा कुछ भी नही दिया गया है।

निवेश, पर्यावरण और वृक्षों की कटाई

"निवेश प्रोत्साहन के नाम पर सरकार ने सिर्फ प्रचार किया है, परंतु ज़मीनी स्तर पर निवेश होता दिख नहीं रहा है। विकास के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा की अनदेखी को सरकार नकार नहीं सकती है।"

पश्चिमी राजस्थान में अंधाधुंध खेजड़ी के वृक्षों की कटाई हुई है जिसको लेकर जनता में इसका रोष व्याप्त है।


जल समझौते और राष्ट्रीय परियोजनाएं

मंज़ूर तंवर ने राज्य के महत्वपूर्ण जल मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कहा:

  • यमुना जल समझौते में राजस्थान के हितों की अनदेखी की गई है।
  • ईस्टर्न राजस्थान कैनाल जैसी महत्वपूर्ण योजना को “राष्ट्रीय परियोजना” घोषित करने में भाजपा की डबल इंजन सरकार विफल रही।
  • साथ ही, लंबे समय से राज्य में कई महत्वपूर्ण रेल योजनाओं में विस्तार के लिए अपेक्षित प्रयासों की कमी देखी गई है।

कृषि और युवा वर्ग की अनदेखी

"कृषि आय में बढ़ोतरी के लिए सरकार क्या ठोस प्रयास कर रही है? युवाओं के स्वावलंबन के लिए जो घोषणाएं की गई हैं, उनकी पूर्ति और पहले की घोषणाओं का डाटा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।"


इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा का अभाव

"हर बार की भांति इस बार भी इन्फ़्रास्टक्ट में बढ़-चढ़कर घोषणाएं की गई हैं, परंतु समय के साथ बदलती तकनीक, निर्माण गुणवत्ता और हाल ही में हुए भीषण हादसों की रोकथाम के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे इसका स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं रखा गया है।"

Pratahkal Bureau

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