राजस्थान बजट को मनोज दुबे ने बताया किसान विरोधी
भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के अध्यक्ष ने कर्जमाफी, एमएसपी और खाद की किल्लत पर सरकार को घेरते हुए बजट को निराशाजनक करार दिया।

कोटा में बजट के विरोध में वक्तव्य देते भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे।
किसान और कृषि क्षेत्र की अनदेखी
राज्य बजट मे कर्ज से परेशान राजस्थान के किसानों की कर्जमाफी व यूरिया एवं डीएपी के की भारी किल्लत से जूझ रहे किसानों के लिए कोई राहत की घोषणा नहीं की गई। ना ही एमएसपी पर खरीद के लिए बीजेपी की राजस्थान सरकार ने कोई घोषणा की है। भाजपा सरकार का राज्य बजट पूर्ण रूप से किसान विरोधी बजट है।
उम्मीदें और जमीनी हकीकत
"राज्य बजट मे गाँव, किसान, खेत-खलिहानो के भविष्य की मजबूत नींव की उम्मीद थी, जों पूरी तरह से अधूरी रही"
मनोज दुबे ने कहा की राजस्थान की भाजपा सरकार के बजट मे किसान पूर्ण रूप से उपेक्षित रहा है, बढ़ती लागत और महंगाई के बावजूद किसानों को कोई विशेष पैकेज नहीं दिया गया। डीएपी-यूरिया संकट पर ठोस प्रावधान नहीं है। किसानों को मुफ्त बिजली अब भी सपना है। कृषि विकास दर में गिरावट के बीच किसानों की आय दोगुनी करने का भाजपा सरकार का दावा खोखला है।
राज्य बजट मे प्रदेश के किसानों को "गाँव, किसान, खेत-खलिहानो के भविष्य की मजबूत नींव की उम्मीद थी जों पूरी तरह से अधूरी रही", बजट मात्र आंकड़ों का ढांचा बनकर रह गया है। राज्य बजट मे दिशा, दृष्टि और किसान हित-तीनों का अभाव स्पष्ट है।
आम जनता और वैट (VAT) की समस्या
मनोज दुबे ने कहा की राजस्थान सरकार को राज्य बजट मे पेट्रोल और डीजल पर वैट कम करने की घोषणा कर राज्य की आम जानता को राहत देनी चाहिए थी, राजस्थान में पड़ोसी राज्यों की तुलना में तेल की कीमतें अधिक हैं। वैट कम होने से न केवल महंगाई कम होती, बल्कि ट्रांसपोर्ट और आम आदमी को बड़ी राहत मिलती लेकिन राज्य बजट मे वैट मे कमी की घोषणा नहीं होने से राजस्थान की आम जानता मे निराशा है।
स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर सवाल
- ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) व (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) को अपग्रेड करने की घोषणा करनी चाहिए थी, ताकि ग्रामीण इलाकों में बेहतर इलाज मिल सके।
- महंगाई से जूझ रही आम जनता, बेरोजगारी से परेशान युवा, बदहाल कानून व्यवस्था इन गंभीर मुद्दों पर ठोस समाधान देने की कोई घोषणा नहीं है।

Pratahkal Bureau
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