भारतीय किसान संघ ने राजस्थान सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे मिलाजुला बताया है। संघ के अनुसार, बजट में कृषि एवं किसान हित से जुड़े कई सकारात्मक प्रावधान किए गए हैं, किंतु कुछ महत्वपूर्ण मांगों की अनदेखी से किसानों में निराशा भी है।


संघ के पदाधिकारियों का संयुक्त वक्तव्य

प्रान्त अध्यक्ष शंकरलाल नागर और महामंत्री अंबालाल शर्मा, प्रान्त प्रचार प्रमुख आशीष मेहता, सम्भाग अध्यक्ष गिरीराज चौधरी, जिला अध्यक्ष जगदीश कलमंडा, प्रदेश महिला प्रमुख रमा शर्मा एवं प्रान्त महिला प्रमुख रजनी नागर ने संयुक्त वक्तव्य में अपनी बात रखी।

  • "ग्रामदानी भूमियों में किसानों को खातेदारी अधिकार देने तथा उपनिवेशन विभाग का राजस्व विभाग में विलय करने का निर्णय सराहनीय है।"
  • "इससे राजस्व भूमि संबंधी समस्याओं का समाधान होगा, रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन होगा तथा पात्र किसानों को योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।"

सिंचाई और जल प्रबंधन हेतु प्रमुख घोषणाएं

भारतीय किसान संघ ने बजट के इन आंकड़ों को प्रदेश में सिंचित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है:

  • सिंचाई परियोजनाओं हेतु: ₹11,300 करोड़
  • यमुना जल परियोजना हेतु: ₹32,000 करोड़
  • सूक्ष्म सिंचाई (3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र): ₹1,340 करोड़
  • मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना (1 लाख 10 हजार जल संरचनाएं): ₹2,500 करोड़

कृषि विविधीकरण, डेयरी एवं पर्यावरण संरक्षण

भारतीय किसान संघ के अनुसार, जैविक कृषि, डिजिटल खेती, डेयरी एवं पशुपालन को बढ़ावा देने वाली योजनाएं किसानों की आय वृद्धि में सहायक होंगी।

  • झींगा पालन को औद्योगिक विद्युत दर के स्थान पर कृषि दरों में शामिल करना खारे पानी वाले क्षेत्रों के किसानों के लिए राहतकारी निर्णय है।
  • प्रत्येक पंचायत मुख्यालय पर 3,496 वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों के लिए ₹270 करोड़ का प्रावधान।
  • प्राकृतिक खेती हेतु उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना।
  • डेयरी ब्रांड ‘सरस’ को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने हेतु ₹100 करोड़ का प्रावधान एवं डेयरी विकास बजट में वृद्धि।
  • ‘गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस’ अपनाने वाले किसानों को कार्बन क्रेडिट देने की घोषणा।
  • सोलर परियोजनाओं में 10 प्रतिशत भूमि वृक्षारोपण हेतु आरक्षित करने का निर्णय।

लंबित मांगें और किसानों की निराशा

सकारात्मक घोषणाओं के बावजूद, संघ ने कुछ बिंदुओं पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है जहाँ किसान स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं:

  • "फरवरी 2022 से लंबित कृषि विद्युत कनेक्शनों के निस्तारण हेतु कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया, जिससे किसानों में निराशा है।"
  • "कृषि विद्युत बकाया बिलों पर पेनल्टी एवं ब्याज में राहत की घोषणा भी अपेक्षित थी।"
  • ऋण राहत आयोग के गठन तथा फसलों के लागत व मूल्य निर्धारण हेतु स्वतंत्र आयोग की मांग भी अधूरी रही।
  • "गेहूं पर बोनस की घोषणा नहीं होने से किसानों में समर्थन मूल्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।"

क्रियान्वयन और भविष्य की मांग

भारतीय किसान संघ ने सरकार से मांग की है कि घोषित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए तथा पूरक बजट में कृषि एवं किसान कल्याण से जुड़े लंबित विषयों पर आवश्यक राहत प्रावधान किए जाएं। संघ ने अंत में कहा कि सकारात्मक घोषणाओं के बावजूद किसानों की मूलभूत समस्याओं के समाधान हेतु और ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story