कोटा, जयपुर 27 फरवरी। राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को पूर्व मंत्री और विधायक शांति धारीवाल ने पुरापाषाण काल की नदियों और धृष्टावती (सरस्वती) नदी के पुनर्जीवन को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने सदन में यह सवाल उठाया कि "क्या सरकार ने डेनमार्क के आरहस शहर से किसी एमओयू के जरिए प्रोजेक्ट शुरू किया है? यदि हां, तो उसकी शर्तें और खर्च क्या हैं?" धारीवाल के इन तीखे सवालों के बाद सरकार ने अपने आधिकारिक जवाब में साफ कहा कि जल संसाधन विभाग द्वारा आरहस शहर, डेनमार्क से पुरापाषाण काल की नदियों से संबंधित किसी भी प्रोजेक्ट के लिए कोई एमओयू नहीं किया गया है।

एमओयू नहीं लेकिन एलओआई पर हुआ करार

विधायक शांति धारीवाल के सवाल के जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया है कि भले ही कोई ठोस एमओयू नहीं हुआ, लेकिन तकनीकी सहयोग के लिए एक "Letter of Intent" (LOI) जरूर मौजूद है। सरकार ने बताया कि 9 दिसंबर 2024 को “राइजिंग राजस्थान” कार्यक्रम के दौरान राजस्थान सरकार के जल संसाधन विभाग और डेनमार्क दूतावास के बीच सरस्वती पेलियो चैनल के पुनरुद्धार के लिए एक LOI पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह मात्र तकनीकी सहयोग की बात है, अभी तक कोई ठोस करार नहीं हुआ है।

धृष्टावती पुनर्जीवन: अब तक की बैठकों का सिलसिला

सरकार द्वारा सदन की मेज पर रखे गए परिशिष्ट ‘अ’ के अनुसार अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा पेश किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक 24 मार्च 2025 को डेनिश अधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई थी। इसके बाद 28 अप्रैल 2025 को पूर्व अध्ययन रिपोर्ट रॉयल डेनिश दूतावास, नई दिल्ली को भेजी गई और उसी दिन जयपुर में बिरला वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान में एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। 18 जून 2025 को इस विषय पर एक सलाहकार समिति का गठन किया गया, जिसका 10 फरवरी 2026 को पुनर्गठन और विस्तार किया गया।

पायलट प्रोजेक्ट और भविष्य की कार्यशालाएं

परियोजना की प्रगति को लेकर सरकार ने बताया कि 14 अक्टूबर 2025 को Managed Aquifer Recharge (MAR) डेमोंस्ट्रेशन पर चर्चा की गई थी। इसके उपरांत 22 जनवरी 2026 को पायलट MAR के लिए रिचार्ज साइट पहचान हेतु कार्यशाला का आयोजन हुआ। हालांकि, सरकार ने सदन को यह भी सूचित किया कि पायलट प्रोजेक्ट की रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।

खर्च के खुलासे पर सरकार का मौन और धारीवाल का हमला

मामले में सबसे अहम बात यह रही कि सरकार ने अब तक इस परियोजना पर कुल कितना खर्च हुआ है, इसका कोई स्पष्ट ब्योरा नहीं दिया। खर्च का खुलासा नहीं होने पर शांति धारीवाल ने सरकार पर हमला बोला। धारीवाल ने तीखे सवाल उठाए कि "यदि एमओयू नहीं है, तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग की वास्तविक स्थिति क्या है? बैठकों और समितियों से आगे क्या जमीन पर काम शुरू हुआ है? खर्च और टाइमलाइन क्यों सार्वजनिक नहीं की गई?" इन सवालों ने सदन में सरस्वती नदी परियोजना की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

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