कोटा/जयपुर। राजस्थान विधानसभा में जन विश्वास उपबंधों का संशोधन विधेयक 2026 को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। पूर्व यूडीएच मंत्री और विधायक शांति धारीवाल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि "सरकार कानून बना रही है या मज़ाक कर रही है।" धारीवाल ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि इस विधेयक के प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल हैं, जो संसदीय कार्य मंत्री के साथ-साथ विधि मंत्री भी हैं, लेकिन इस बिल के जरिए सरकार 11 अलग-अलग विभागों से जुड़े एक्ट में संशोधन करने जा रही है। उन्होंने गंभीर सवाल उठाया कि जब अलग-अलग विभागों के कानूनों में संशोधन हो रहे हैं तो अलग-अलग बिल लाकर उन विभागों के मंत्रियों से जवाब क्यों नहीं दिलवाया जा रहा।

11 एक्ट में एक साथ संशोधन पर उठाए सवाल

धारीवाल ने कहा कि सरकार नगर पालिका एक्ट, फॉरेस्ट एक्ट, टेनेंसी एक्ट, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट और स्टांप एक्ट सहित 11 कानूनों में संशोधन कर रही है, जबकि सभी एक्ट अलग-अलग विभागों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के संशोधन के लिए अलग-अलग बिल आने चाहिए थे ताकि संबंधित मंत्री सदन में जवाब देते और व्यापक चर्चा होती। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि "नगर पालिका एक्ट पढ़ा भी है क्या ?" धारीवाल ने कहा कि राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की करीब 20 धाराओं में संशोधन किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या विधि मंत्री ने यह एक्ट पढ़ा भी है। उन्होंने कहा कि यूडीएच मंत्री को भी शायद यह मालूम नहीं होगा कि इस एक्ट की किन-किन धाराओं में संशोधन किया जा रहा है और इससे क्या फायदा होगा।

शिक्षा संस्थानों के प्रावधानों पर भी उठाए सवाल

धारीवाल ने गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों से जुड़े कानून में बदलाव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि "सेक्शन 9 और 12 के प्रावधानों में बदलाव कर पहले जहां 1000 रुपए तक की पेनल्टी थी, उसे बढ़ाकर 2 लाख रुपए तक कर दिया गया है।" उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इससे जन विश्वास बढ़ेगा या घटेगा। धारीवाल ने कहा कि पहले नगर पालिका एक्ट में दोष सिद्ध होने पर ही जुर्माने का प्रावधान था, लेकिन अब बिना दोष सिद्धि के पेनल्टी लगाने का प्रावधान किया जा रहा है।

“इंस्पेक्टर राज खत्म नहीं, बढ़ेगा भ्रष्टाचार”

धारीवाल ने सदन में गरजते हुए कहा कि "इससे इंस्पेक्टर राज कम नहीं होगा बल्कि भ्रष्टाचार और बढ़ेगा।" उन्होंने मंत्रियों की जानकारी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्रियों को खुद पता है क्या बदल रहे हैं। धारीवाल ने सरकार से मांग की कि इतने व्यापक संशोधनों वाले इस विधेयक को जनमत जानने के लिए भेजा जाना चाहिए ताकि जनता और विशेषज्ञों की राय भी सामने आ सके। उन्होंने अंत में स्पष्ट किया कि इतने बड़े पैमाने पर कानूनों में बदलाव बिना पर्याप्त चर्चा के करना उचित नहीं है।

Pratahkal Bureau

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