धर्म का काम हिसाब जोड़ने से नहीं हाथ जोड़ने से होता है: संत प्रभुजी नागर
धतूरिया में श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन संत प्रभुजी नागर ने संस्कारों और विवेक का महत्व समझाया, साथ ही हजारों श्रद्धालुओं ने फागोत्सव मनाया।

अंता के धतूरिया में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन व्यासपीठ से प्रवचन देते संत प्रभुजी नागर और आरती में सम्मिलित विधायक प्रमोद जैन भाया एवं अन्य अतिथि।
भक्ति और समर्पण का महत्व
- "जिसे अपनी भूल नजर आती है, उसे भगवान भी नजर आ जाएंगे।"
- "अपना समय और सम्पत्ति भगवान को सौंपकर देखो। जब अंत समय में यहाँ से जाओगे तो आपकी आत्मा पुण्य से भरी रहेगी।"
- "याद रखें कि धर्म का काम हिसाब जोड़ने से नहीं होता है, भगवान के आगे हाथ जोडने से होता है।"
- "हम धन जोड़ने में इतना व्यस्त हो गये कि हाथ जोडने का समय नहीं मिलता है।"
संस्कृति, मर्यादा और परिवार
मंगलवार को कथा सूत्र देते हुये उन्होंने कहा कि:
"आप खेती-बाड़ी और साड़ी कभी मत छोड़ना। हम भारतीय संस्कृति की मर्यादाओं से जुडे़ रहेंगे तो गांवों में घर-घर आनंद बरसता रहेगा।"
आजकल परिवारों में मन और मान की लडाई चल रही है। जब बेटा बेटी पढ़ लिख कर अधिकारी बनते हैं तो मान बढ़ने से माता-पिता बहुत प्रसन्न होते हैं। यहाँ मान और मन दोनों को मिलाकर चलोगे तो हर कार्य सफल होगा। जो माता-पिता नजर नहीं आते हैं, वे देवता समान हो गये। जो नजर आते हैं, वे माता-पिता ही हैं।
विवेक और चरित्र का बोध
एक प्रेरक प्रसंग में उन्होंने कहा कि:
- "धृतराष्ट्र अंधे नहीं थे लेकिन विवेक से अंधे हो गये थे। जबकि सूरदास दोनों आंखों से अंधे थे लेकिन विवेक से वे अंधे नहीं थे।"
- "इसलिये स्व विवेक से जागृत होकर सदैव सदमार्ग पर चलते रहें। आपकी राह में अवगुण नहीं गुण ही आयेंगे।"
संत नागरजी ने कहा कि विष और विषयों के अंतर पर चिंतन करो। जिस वायु में विष न होकर विषय होते हैं, वहां एकांत में साधु-ंसंत तपस्या करते हुये मिल जायेंगे। उन्होंने युवा पीढ़ी का आव्हान किया कि "कभी अपने चरित्र पर दाग मत लगने देगा। जिनके बेटे-बेटी आज्ञाकारी और संस्कारी होते हैं, उनके माता-पिता की आत्मा प्रसन्न रहती है।"
पौराणिक प्रसंग और फागोत्सव का उल्लास
एक प्रसंग में उन्होने कहा कि विश्वामित्र जिस जगह अनुष्ठान कर रहे थे, वहां राक्षसों ने उसमें बाधा पहुंचाई, क्योंकि वे सिद्ध पुरुष थे। वहां दूसरे महापुरुष भी अनुष्ठान कर रहे थे, उनको किसी ने बाधा नहीं पहंुचाई। इससे पहले जब विश्वामित्र ने राजा हरिश्चंद्र की कठिन परीक्षा ली थी तब भक्त उनको अपराधी की तरह मानते थे।
धतूरिया में श्रीमद भागवत कथा के छठे दिन हजारों श्रोताओं ने उल्लास से मनाया फागोत्सव। मंगलवार को कथा पांडाल में सुमधुर भजनों पर नृत्य करते हुये हजारों भक्तों ने उल्लास के साथ फागोत्सव मनाया।
मुख्य उपस्थिति और समापन
कथा में निम्नलिखित गणमान्य जनों ने भागवत महाआरती की:
- पूर्व मंत्री एवं अंता विधायक प्रमोद जैन भाया
- जिला प्रमुख श्रीमती उर्मिला जैन भाया
- कथा आयोजक पटेल हरिशचंद्र नागर परिवार सहित हजारों श्रोता
बुधवार को इस विराट कथा का समापन होगा।

Pratahkal Bureau
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