कोटा में लोकतंत्र के महापर्व पर सियासत का साया: पूर्व मंत्री शांति धारीवाल का निर्वाचन विभाग पर भीषण प्रहार, दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

राजस्थान के कोटा में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक गलियारों में उस समय भूचाल आ गया, जब पूर्व मंत्री और कोटा उत्तर के विधायक शांति धारीवाल ने निर्वाचन विभाग पर गंभीर फर्जीवाड़े के आरोप लगाते हुए सीधा मोर्चा खोल दिया। धारीवाल ने जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए सत्ताधारी भाजपा सरकार पर यह सनसनीखेज आरोप लगाया कि प्रशासन के माध्यम से कांग्रेस समर्थित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की एक सोची-समझी साजिश रची जा रही है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि नियमों की अवहेलना कर एक भी पात्र मतदाता का नाम काटा गया, तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी और प्रभावित लोगों को निर्वाचन विभाग के दरवाजे पर लाकर खड़ा कर दिया जाएगा।

विवाद की जड़ उस समय और गहरी हो गई जब शांति धारीवाल के नेतृत्व में कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल जिला निर्वाचन अधिकारी से मिलने पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल में जिला कांग्रेस अध्यक्ष राखी गौतम और पीपल्दा विधायक चेतन पटेल भी प्रमुख रूप से शामिल थे। मुलाकात के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए धारीवाल ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल दागे। उन्होंने दावा किया कि बैठक के दौरान निर्वाचन अधिकारी उनके तार्किक सवालों का संतोषजनक जवाब देने में पूरी तरह विफल रहे, जिससे विभाग की निष्पक्षता पर संदेह के बादल और गहरे हो गए हैं। पूर्व मंत्री ने निर्वाचन तंत्र और भाजपा के बीच कथित मिलीभगत को लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बताया।

इस पूरे घटनाक्रम में धारीवाल ने बीएलओ की भूमिका पर भी गंभीर उंगली उठाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े बीएलओ के जरिए नियमों को ताक पर रखकर हजारों की संख्या में फॉर्म भरवाए गए हैं। उन्होंने निर्वाचन नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि एक बीएलओ एक दिन में अधिकतम दस फॉर्म ही प्राप्त कर सकता है, परंतु वर्तमान प्रक्रिया में एक ही दिन में सैकड़ों और हजारों की संख्या में फॉर्म स्वीकार किए गए, जो सीधे तौर पर चुनावी धांधली की ओर इशारा करते हैं। धारीवाल ने प्रशासन से पूछा कि आखिर किसकी शह पर इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

कानूनी पहलुओं को रेखांकित करते हुए धारीवाल ने तीन बुनियादी आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने कहा कि नियम के अनुसार, किसी भी आपत्ति के आने पर रिटर्निंग अधिकारी को सात दिनों के भीतर सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर विमर्श करना अनिवार्य है, लेकिन कोटा में ऐसी किसी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी मतदाता का नाम विलोपित करने से पहले उसे औपचारिक नोटिस देना कानूनी अनिवार्यता है, जिसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। विधायक चेतन पटेल ने भी पीपल्दा विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि बीएलओ भारी दबाव में काम कर रहे हैं और वे अपनी पीड़ा भी व्यक्त कर रहे हैं।

इस कड़े विरोध का समापन एक चेतावनी भरे लहजे में हुआ, जहां कांग्रेस नेतृत्व ने सामूहिक रूप से प्रशासन को आगाह किया। जिला अध्यक्ष राखी गौतम ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटने नहीं दिया जाएगा और यदि प्रशासन ने अपनी निष्पक्षता साबित नहीं की, तो कोटा की सड़कों पर एक विशाल जन-आंदोलन खड़ा किया जाएगा। इस घटना ने आने वाले चुनावों से पहले कोटा की चुनावी सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है, जिससे अब सबकी नजरें निर्वाचन विभाग के अगले कदम और मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन पर टिकी हुई हैं।

Pratahkal Bureau

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