चुनाव खत्म होते ही आम जनता पर महंगाई की मार, पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दाम बढ़े: मनोज दुबे
कांग्रेस नेता मनोज दुबे ने मोदी सरकार के फैसले को बताया जनविरोधी, कहा- तेल की मूल्यवृद्धि से बढ़ेगी माल ढुलाई और रोजमर्रा की वस्तुएं होंगी महंगी।

केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दामों में की गई भारी बढ़ोतरी के विरोध में कोटा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनोज दुबे ने केंद्र सरकार की नीतियों की तीव्र निंदा की है। (यह चित्र केवल प्रतीकात्मक और संदर्भ समझाने के उद्देश्य से एआई (AI) द्वारा तैयार किया गया है। Image generated by AI for illustrative purposes.)
कोटा, 15 मई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनोज दुबे ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा आम जनता पर महंगाई का ट्रिपल अटैक करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सरकार द्वारा पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दामों में की गई भारी बढ़ोतरी की तीव्र निंदा करते हुए कहा कि चुनाव खत्म होते ही आम जनता पर महंगाई की मार शुरू हो गई है। नेता मनोज दुबे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम बढ़ाने का मोदी सरकार का यह निर्णय पूरी तरह से गरीब, मजदूर, किसान व आमजन विरोधी है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज दुबे ने देश के वर्तमान हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले गैस के दाम बढ़े, फिर सोने पर टैक्स बढ़ा दिया गया और इसके बाद दूध के दाम भी 2 रुपये बढ़ा दिए गए। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अब पेट्रोल पर 3.14 रुपये, डीजल पर 3.11 रुपये और सीएनजी पर 2 रुपये प्रति किलो बढ़ा दिए गए हैं। मनोज दुबे ने चेतावनी देते हुए कहा कि चुनौती यही नहीं खत्म होती, बल्कि अब देश में महंगाई का तांडव शुरू होगा। उन्होंने इसके दूरगामी प्रभावों को रेखांकित करते हुए कहा कि जैसे ही डीजल के दाम बढ़ेंगे, वैसे ही माल की ढुलाई बढ़ जाएगी और ढुलाई बढ़ते ही रोजमर्रा की वस्तुएं बेहद महंगी हो जाएंगी, जिसका सीधा और सबसे घातक असर देश की गरीब जनता पर पड़ेगा।
आधिकारिक तौर पर विरोध दर्ज कराते हुए मनोज दुबे ने कहा कि देशभर में बढ़े पेट्रोल-डीजल के दामों ने आम आदमी का पूरा बजट बिगाड़ कर रख दिया है। पेट्रोल और डीजल के बढ़े दामों से देश का किसान वर्ग भारी परेशान है, क्योंकि इसका सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ेगा और खेती का लागत खर्च और अधिक बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि देश की आम जनता पहले ही कमरतोड़ महंगाई से त्रस्त है, और अब इस नए फैसले के बाद जनता के हर सफर और हर जरूरत पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। यह जनविरोधी निर्णय दर्शाता है कि सरकार को आम नागरिकों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है।

