कैंसर से पति को खोने के बाद आर्थिक संकट, जिम्मेदारियों का बोझ और भविष्य की अनिश्चितताओं के बीच एक मां ने सिलाई मशीन के सहारे अपने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया। ओडिशा के गंजम जिले के छोटे से गांव बाकलीकोड़ा की अपूर्वा नायक ने धागा-धागा जोड़कर अपने बेटे जिगर नायक का जीवन संवारा। आज वही जिगर जेईई-एडवांस्ड में सफलता हासिल कर अपने गांव और परिवार का पहला आईआईटीयन बनने जा रहा है।

करियर एवं केयर सिटी कोटा का एक बार फिर सामाजिक बदलाव में योगदान सामने आया है। कोटा में दो वर्ष रहकर तैयारी करने वाले एलन स्टूडेंट जिगर नायक ने जेईई-एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 5474 तथा ओबीसी-एनसीएल कैटेगरी रैंक 1201 हासिल की है। वहीं जेईई-मेन में उसने ऑल इंडिया रैंक 17783 और ओबीसी-एनसीएल कैटेगरी रैंक 4597 प्राप्त की। इससे पहले जिगर ने 10वीं कक्षा में 95 प्रतिशत और 12वीं कक्षा में 87 प्रतिशत अंक अर्जित किए थे।

जिगर नायक की कहानी संघर्ष, त्याग और सपनों को साकार करने के अदम्य संकल्प की मिसाल है। आर्थिक तंगी, पिता का साया उठ जाने और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उसने हार नहीं मानी। अपने सपनों को साकार करने के लिए वह कोटा आया और एलन करियर इंस्टीट्यूट में प्रवेश लेकर लगातार दो वर्षों तक कड़ी मेहनत की। उसकी मेहनत रंग लाई और अब वह आईआईटी में प्रवेश की दहलीज पर खड़ा है।

जिगर के पिता जूरीनाथ गुजरात की एक टेक्सटाइल इंडस्ट्री में कार्यरत थे। परिवार का जीवन सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन अचानक उन्हें कैंसर होने का पता चला। इलाज के दौरान परिवार की पूरी जमा पूंजी खर्च हो गई। वर्ष 2020 में जूरीनाथ का निधन हो गया। पिता के निधन के बाद पहले से कमजोर आर्थिक स्थिति और अधिक संकटग्रस्त हो गई, लेकिन मां अपूर्वा नायक ने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। उन्होंने संकल्प लिया कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां आएं, बेटे के सपनों को टूटने नहीं देंगी।

परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अपूर्वा नायक ने बेटे की पढ़ाई का दायित्व भी संभाला। उन्होंने गोल्ड लोन लिया और घर-घर से सिलाई का काम लेकर टेलरिंग शुरू की। दिनभर सिलाई मशीन पर मेहनत कर वह घर का खर्च चलाती रहीं और बेटे की शिक्षा के लिए पैसे जोड़ती रहीं। कई बार आर्थिक परेशानियां इतनी बढ़ गईं कि घर चलाना मुश्किल हो गया, लेकिन उन्होंने कभी जिगर को इसका एहसास नहीं होने दिया।

जिगर ने बताया कि 10वीं कक्षा तक उसे जेईई परीक्षा के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी। सोशल मीडिया पर इंजीनियरिंग और जेईई परीक्षा से जुड़े वीडियो देखने के बाद उसे पहली बार इस परीक्षा की जानकारी मिली। उसी समय उसके मन में आईआईटीयन बनने का सपना जागा। उसने तय किया कि वह पढ़ाई के दम पर अपनी मां की जिंदगी बदलेगा। इसके बाद वह कोटा आया और पिछले दो वर्षों तक एलन में रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट के रूप में जेईई की तैयारी की। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसे 11वीं और 12वीं कक्षा में फीस में छूट भी मिली।

जिगर का एक छोटा भाई भी है, जो वर्तमान में सातवीं कक्षा में पढ़ रहा है। जिगर का कहना है कि उसकी मेहनत केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य के लिए है। वह चाहता है कि आईआईटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसकी मां को संघर्ष न करना पड़े और उसके छोटे भाई की शिक्षा भी बिना किसी परेशानी के पूरी हो सके।

एलन के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने कहा कि ऐसी कहानियां समाज के लिए प्रेरणा बनती हैं, जिनमें विद्यार्थी के साथ-साथ अभिभावकों का संघर्ष भी शामिल होता है। उन्होंने कहा कि जब ऐसे संदेश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचते हैं तो सामाजिक बदलाव के प्रयास साकार होते हैं। हमारा प्रयास है कि पढ़ाई में किसी भी विद्यार्थी के सामने कोई बाधा न आए और प्रतिभावान विद्यार्थियों को उनकी योग्यता के अनुरूप उचित अवसर मिल सके।

अपूर्वा नायक के संघर्ष, त्याग और समर्पण से लिखी गई यह सफलता की कहानी केवल एक विद्यार्थी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस मां की जीत है जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने बेटे के सपनों को जिंदा रखा और उसे गांव का पहला आईआईटीयन बनने की राह तक पहुंचाया।

Pratahkal Bureau

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