सीओपीडी पर नई वैश्विक रिपोर्ट: फेफड़ों की बीमारियों में बढ़ती चिंता, समय पर पहचान जरूरी
कोटा में सीओपीडी पर नई वैश्विक रिपोर्ट जारी, जिसमें फेफड़ों की बीमारियों के बढ़ते खतरे पर चेतावनी दी गई है। विशेषज्ञ डॉ. विदित सक्सेना ने बताया कि समय पर जांच और इनहेलर थेरेपी से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। तंबाकू, प्रदूषण और संक्रमण इस बीमारी के प्रमुख कारण हैं।

कोटा, 19 नवंबर। फेफड़ों की गंभीर बीमारी क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव लंग डिज़ीज़ (सीओपीडी) को लेकर वैश्विक स्तर पर चेतावनी बढ़ गई है। नई वैश्विक रिपोर्ट में बताया गया है कि सीओपीडी लंबे समय तक चलने वाली फेफड़ों की बीमारी है, जिसमें लगातार खांसी, सांस लेने में कठिनाई, बलगम और सीने में जकड़न जैसे लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं।
कोटा हार्ट इंस्टिट्यूट, श्रीजी हॉस्पिटल और पल्मोकेयर लंग एलर्जी एंड चेस्ट क्लिनिक के सीनियर कंसल्टेंट रेस्पिरेट्री मेडिसिन एवं इंटरवेलिस्ट डॉ. विदित सक्सेना ने बताया कि सीओपीडी के कई कारण हो सकते हैं। इनमें आनुवंशिक कारण, जन्म के समय फेफड़ों का ठीक से विकसित न होना, तंबाकू और धुएँ का असर, चूल्हे या वाहन प्रदूषण, जंगल की आग का धुआँ, वेपिंग और ई-सिगरेट जैसी आदतें शामिल हैं। इसके अलावा बचपन के संक्रमण, टीबी और एचआईवी से जुड़े संक्रमण भी आगे चलकर इस बीमारी का रूप ले सकते हैं।
डॉ. सक्सेना ने बताया कि भारत में सीओपीडी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। विभिन्न अध्ययनों में इसकी दर 2.5% से 10% तक बताई गई है, जो स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी है। उन्होंने कहा कि बार-बार सांस फूलना, घरघराहट, लगातार खांसी, श्वसन संक्रमण और तंबाकू या प्रदूषण के संपर्क में आने वाले लोगों को समय पर जांच कराना चाहिए।
सीओपीडी की गंभीरता फेफड़ों की जांच FEV1/FVC के आधार पर तय की जाती है और इसे हल्का, मध्यम, गंभीर और बहुत गंभीर चार श्रेणियों में बांटा जाता है। डॉ. सक्सेना ने स्पष्ट किया कि यह बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं होती, लेकिन सही इलाज और जीवनशैली के बदलाव से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
उन्होने बताया कि इनहेलर दवाइयाँ, धूम्रपान छोड़ना, फेफड़ों का व्यायाम, लंबे समय तक ऑक्सीजन थेरेपी और जरूरत पड़ने पर फेफड़ों की सर्जरी जैसी तकनीकें मरीजों की स्थिति में सुधार लाती हैं और मृत्यु दर को कम करती हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि खांसी या सांस संबंधी किसी भी समस्या को हल्के में न लें और समय रहते विशेषज्ञ से जांच कराएं, ताकि बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सके।
सीओपीडी के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य अधिकारियों और विशेषज्ञों को सतर्क कर दिया है, और समय पर पहचान व उपचार के महत्व को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।
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Pratahkal Bureau
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