कोटा। चिकित्सा विज्ञान आज जिस तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है, उसने इलाज और सर्जरी की परिभाषा ही बदल दी है। अत्याधुनिक तकनीकों के सहारे जटिल रोगों का उपचार अब अधिक सुरक्षित, सटीक और मरीजों के लिए कम कष्टदायक होता जा रहा है। इसी क्रम में इटर्नल हॉस्पिटल, जयपुर और आईएमए कोटा व एपीए कोटा के संयुक्त तत्वावधान में कोटा शहर में एक विशेष संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया, जिसने चिकित्सा जगत में रोबोटिक और मिनिमल इनवेसिव तकनीकों के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया।

इस सत्र का मुख्य आकर्षण विश्व प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीन शर्मा रहे, जिन्होंने हृदय रोगों के उपचार में हो रहे नवीनतम नवाचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आधुनिक कार्डियोलॉजी में अब बिना बड़े ऑपरेशन के हार्ट वाल्व बदलना संभव हो गया है। टावी जैसी तकनीकें गंभीर मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई हैं। इसके साथ ही हार्ट की सख्त नसों में जमे कैल्शियम को हटाने के लिए रोटब्लेशन तकनीक से की जा रही एंजियोप्लास्टी को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बताया गया, जिससे मरीजों की रिकवरी तेजी से हो रही है और जोखिम में उल्लेखनीय कमी आई है।

कार्यक्रम के दौरान इटर्नल हॉस्पिटल की को-चेयरपर्सन मंजू शर्मा ने संस्थान के विजन और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इटर्नल हॉस्पिटल राजस्थान का पहला ऐसा अस्पताल है, जहां अत्याधुनिक Da Vinci Xi रोबोटिक सर्जरी सिस्टम के माध्यम से सर्जरी की जा रही है। वहीं हॉस्पिटल के सीईओ डॉ. प्राचीश प्रकाश ने सभी अतिथियों और चिकित्सकों का स्वागत करते हुए चिकित्सा सेवाओं में गुणवत्ता और नवाचार को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्डियक साइंस विभाग के चेयरमैन और सीनियर कार्डियक सर्जन डॉ. अजीत बाना ने बायपास सर्जरी में आए तकनीकी सुधारों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि मिनिमल इनवेसिव तकनीक, उन्नत मशीनें और बेहतर पोस्ट-ऑपरेटिव केयर के कारण अब बायपास सर्जरी के परिणाम पहले की तुलना में कहीं अधिक सफल हो रहे हैं। इससे मरीजों की जीवन गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार देखने को मिल रहा है।

न्यूरोसाइंस विभाग के चेयरमैन डॉ. सुरेश गुप्ता ने स्ट्रोक प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि समय पर उपचार से लकवे जैसी गंभीर जटिलताओं से मरीज को बचाया जा सकता है। उन्होंने इंटरवेंशनल पद्धति से स्ट्रोक के इलाज में मिल रही सफलता को चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि बताया।

इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी पर प्रकाश डालते हुए डॉ. के. के. शर्मा ने बताया कि फेफड़ों की कई जटिल बीमारियों का इलाज अब बिना बड़े ऑपरेशन के संभव हो गया है। आधुनिक जांच और उपचार विधियों से मरीजों को कम दर्द और शीघ्र राहत मिल रही है। वहीं जनरल एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. कपिलेश्वर विजय ने पेट की सर्जरी में रोबोटिक तकनीक की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे सर्जरी में सटीकता बढ़ती है, रक्तस्राव कम होता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट पाता है।

सत्र के अंत में आईएमए प्रेजिडेंट डॉ. के. श्रृंगी और एपीआई प्रेजिडेंट डॉ. सी. पी. मीना ने जयपुर से आए सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के वैज्ञानिक और ज्ञानवर्धक सत्र न केवल चिकित्सक समुदाय के लिए उपयोगी हैं, बल्कि कोटा के नागरिकों को भी उन्नत और विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवाओं का लाभ दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Pratahkal Newsroom

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