री-नीट 2026: फिजिक्स और कैमिस्ट्री तय करेंगी रैंक, बायोलॉजी रही अपेक्षाकृत आसान
री-नीट 2026 के विस्तृत विश्लेषण में फिजिक्स और कैमिस्ट्री का पेपर अभ्यर्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा, जबकि बायोलॉजी अपेक्षाकृत आसान रही। विशेषज्ञों के अनुसार इस बार रैंक निर्धारण में यही दो विषय निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 के री-एग्जामिनेशन के बाद अभ्यर्थियों और विशेषज्ञों के बीच प्रश्नपत्र के स्तर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार इस बार परीक्षा में फिजिक्स और कैमिस्ट्री ने अभ्यर्थियों की वास्तविक तैयारी की कड़ी परीक्षा ली, जबकि बायोलॉजी का पेपर अपेक्षाकृत आसान रहा। ऐसे में अंतिम रैंकिंग पर सबसे अधिक प्रभाव फिजिक्स और कैमिस्ट्री के प्रदर्शन का पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
एलन करियर इंस्टीट्यूट, कोटा के प्रेसिडेंट विनोद कुमावत ने री-नीट 2026 के विस्तृत विश्लेषण में बताया कि परीक्षा का समग्र स्तर औसत से बेहतर रहा। फिजिक्स और कैमिस्ट्री के प्रश्न न केवल कॉन्सेप्चुअल थे, बल्कि कई सवाल लंबे, गणनात्मक और ट्रिकी भी रहे। परीक्षा चार कोड—50, 60, 70 और 80—में आयोजित की गई।
फिजिक्स का प्रश्नपत्र ओवरऑल कठिन और गहन अवधारणाओं पर आधारित रहा। कई प्रश्नों में गहरी समझ और विस्तृत गणना की आवश्यकता थी। 11वीं कक्षा के पाठ्यक्रम से 21 तथा 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम से 24 प्रश्न पूछे गए। विषयवार विश्लेषण में मैकेनिक्स और इलेक्ट्रोडायनेमिक्स से सर्वाधिक 13-13 प्रश्न शामिल रहे। इसके अलावा मॉडर्न फिजिक्स एवं इलेक्ट्रॉनिक्स से आठ, थर्मल फिजिक्स से पांच तथा एसएचएम एंड वेव्स और ऑप्टिक्स से तीन-तीन प्रश्न पूछे गए। विशेषज्ञों के अनुसार दो प्रश्नों को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। ईएम वेव्स के एक प्रश्न में दो संभावित उत्तर दिए गए हैं, जबकि एरर संबंधी एक प्रश्न के सभी विकल्प गलत बताए जा रहे हैं। ऐसे में इन प्रश्नों को बोनस दिए जाने की मांग उठ सकती है।
कैमिस्ट्री का प्रश्नपत्र भी अभ्यर्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। विशेष रूप से फिजिकल कैमिस्ट्री के प्रश्न गहन, गणनात्मक और अवधारणात्मक स्तर पर कठिन रहे। ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक कैमिस्ट्री के प्रश्न भी 3 मई को आयोजित मूल परीक्षा की तुलना में अधिक कठिन माने गए। पेपर में 11वीं कक्षा से 21 तथा 12वीं कक्षा से 24 प्रश्न शामिल थे। फिजिकल कैमिस्ट्री से 15, इनऑर्गेनिक कैमिस्ट्री से 16 और ऑर्गेनिक कैमिस्ट्री से 14 प्रश्न पूछे गए। कोऑर्डिनेशन कंपाउंड से सर्वाधिक छह प्रश्न आए, जबकि ऑक्सीजन युक्त यौगिकों से चार और थर्मोडायनेमिक्स से तीन प्रश्न पूछे गए। प्रश्नों के पैटर्न में 36 सिंगल करेक्ट, तीन असेर्शन-रीजनिंग, चार स्टेटमेंट आधारित और दो मैच-द-कॉलम प्रकार के प्रश्न शामिल थे। मल्टीपल करेक्ट टाइप का कोई प्रश्न नहीं पूछा गया।
वहीं बायोलॉजी का प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों के लिए अपेक्षाकृत राहत लेकर आया। विशेषज्ञों के अनुसार इसका समग्र स्तर आसान रहा। प्रश्नपत्र में 11वीं कक्षा के पाठ्यक्रम से 52 और 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम से 38 प्रश्न शामिल किए गए। इस बार प्रश्नों के विषयवार वितरण में भी बदलाव देखने को मिला। कुछ ऐसे टॉपिक्स से अधिक प्रश्न पूछे गए, जिनसे पूर्व वर्षों में अपेक्षाकृत कम प्रश्न आते थे। जेनेटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी से प्रश्नों की संख्या कम रही, जबकि लिविंग वर्ल्ड और सेल बायोलॉजी से अपेक्षाकृत अधिक प्रश्न पूछे गए। एनाटॉमी से कोई प्रश्न नहीं पूछा गया और जूलॉजी सेक्शन में मैच-द-कॉलम प्रकार के प्रश्न भी शामिल नहीं थे।
बायोलॉजी में सबसे अधिक 13 प्रश्न ह्यूमन फिजियोलॉजी से पूछे गए। इसके अलावा जेनेटिक्स एंड बायोटेक्नोलॉजी तथा प्लांट फिजियोलॉजी से 11-11, सेल बायोलॉजी से 10, प्लांट डाइवर्सिटी से नौ और इकोलॉजी से सात प्रश्न शामिल रहे। प्रश्नों के पैटर्न में 32 सिंगल करेक्ट, पांच असेर्शन-रीजनिंग, 11 इनकरेक्ट टाइप, 14 फिल इन द ब्लैंक्स, आठ स्टेटमेंट आधारित तथा आठ मैच-द-कॉलम प्रकार के प्रश्न पूछे गए। यहां भी मल्टीपल करेक्ट टाइप का कोई प्रश्न नहीं था।
विशेषज्ञों का मानना है कि बायोलॉजी के अपेक्षाकृत आसान रहने और फिजिक्स-कैमिस्ट्री के चुनौतीपूर्ण स्तर के कारण इस वर्ष मेरिट सूची में अंतर पैदा करने का सबसे बड़ा आधार यही दोनों विषय बन सकते हैं। ऐसे में अंतिम रैंक और कटऑफ पर फिजिक्स तथा कैमिस्ट्री के प्रदर्शन का निर्णायक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

Pratahkal Bureau
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