नीट यूजी 2026 परीक्षा का रद्द होना देश के 22 लाख से अधिक परीक्षार्थियों और उनके परिजनों के अटूट सपनों पर एक गहरा आघात है। वंदना कॅरियर इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर तुषार दुबे ने इस संवेदनशील विषय पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि नीट यूजी पेपर लीक की घटनाएं मात्र एक परीक्षा की विफलता नहीं, बल्कि लाखों विद्यार्थियों के परिश्रम और उनके परिवारों की उम्मीदों पर सीधी चोट है। उन्होंने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्षों की कठोर मेहनत जब बार-बार भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ती है, तो इसका उत्तरदायी आखिर कौन है? यद्यपि सरकार ने पूर्व में सख्त कानूनों का आश्वासन दिया था, किंतु यदि प्रतिवर्ष एक ही इतिहास दोहराया जा रहा है, तो अब कोरे आश्वासनों के स्थान पर निष्पक्ष परीक्षा संचालन और दोषियों के विरुद्ध ऐसी कठोरतम कार्रवाई की आवश्यकता है जिसे देख भविष्य में कोई भी प्रश्नपत्र की गरिमा से खेलने का साहस न कर सके।

तुषार दुबे ने स्पष्ट किया कि नीट यूजी 2026 की परीक्षा का रद्द होना उन लाखों प्रतिभावान छात्रों के लिए एक बड़ा मानसिक और भावनात्मक झटका है जिन्होंने अपनी सफलता के लिए दिन-रात एक कर दिए थे। हालांकि उन्होंने सीबीआई जांच के निर्णय को सही दिशा में बढ़ाया गया कदम बताया, किंतु साथ ही सचेत किया कि बार-बार पेपर लीक होना युवाओं के भविष्य के साथ एक क्रूर खिलवाड़ है। परीक्षा का निरस्त होना इस तथ्य का प्रमाण है कि प्रश्नपत्र वितरण और गोपनीयता के स्तर पर भारी अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने व्यवस्था से प्रश्न किया कि आखिर भ्रष्ट तंत्र में सुधार की प्रक्रिया कब पूर्ण होगी?

उन विद्यार्थियों की व्यथा को स्वर देते हुए तुषार दुबे ने कहा कि यह कहना अत्यंत सरल है कि बच्चों को पुन: परीक्षा का अवसर प्राप्त होगा, किंतु उन छात्रों की आंखों में झांककर देखना अनिवार्य है जिन्होंने तैयारी के दौरान दो-दो वर्ष तक मोबाइल का त्याग किया, पारिवारिक समारोहों से दूरी बनाए रखी और जिनके अभिभावकों ने अपनी जीवनभर की कमाई कोचिंग और हॉस्टल की फीस में निवेश कर दी। परीक्षा तंत्र की नींव में लगी भ्रष्टाचार रूपी दीमक ने इन सभी बलिदानों को एक झटके में नष्ट कर दिया है।

दुबे ने अंत में राष्ट्र के भविष्य पर चिंता जताते हुए कहा कि नीट की परीक्षा में सम्मिलित होने वाला प्रत्येक अभ्यर्थी मात्र एक विद्यार्थी नहीं, बल्कि भारत के स्वास्थ्य तंत्र का भावी स्तंभ और संभावित डॉक्टर होता है। यदि चिकित्सा शिक्षा की प्रथम सीढ़ी ही चोरी, पेपर लीक और अविश्वास के कलंक से दूषित हो जाए, तो यह केवल छात्रों के साथ अन्याय नहीं वरन राष्ट्र के स्वास्थ्य भविष्य के साथ एक बड़ा विश्वासघात है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए और इस बार मात्र परीक्षा ही न दोहराई जाए, बल्कि जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए ताकि दोषियों को ऐसी सजा मिले जो मिसाल बन सके।

Pratahkal Bureau

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