नीट परीक्षा रद्द होने पर नितिन विजय की प्रतिक्रिया और ऑनलाइन मोड का सुझाव
नितिन विजय ने सीबीआई जांच का स्वागत किया और पेपर लीक रोकने के लिए परीक्षा को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करने व छात्रों की मानसिक स्थिति पर चर्चा की।

नीट परीक्षा रद्द होने की अप्रिय घटना ने देश के लाखों छात्रों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं, जिस पर मोशन एजुकेशन के फाउंडर और प्रसिद्ध एजुकेटर नितिन विजय ने अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया साझा की है। उन्होंने इस घटना को उन विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से दुखद बताया है जो पूरे वर्ष कड़ी मेहनत कर रहे थे और जिनके मॉक टेस्ट में 600 से अधिक अंक आ रहे थे। श्री विजय ने सरकार द्वारा मामले की जांच त्वरित गति से सीबीआई को सौंपने के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनटीए के नोटिफिकेशन के अनुसार, नीट-2026 के लिए पंजीकृत छात्रों को दोबारा आवेदन या शुल्क जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी और उनका पंजीकरण स्वतः मान्य रहेगा। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे किसी भी अफवाह में आए बिना अपनी ऊर्जा पुनः तैयारी पर केंद्रित करें, कमजोर विषयों पर ध्यान दें और पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र हल करें। भविष्य की सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर देते हुए नितिन विजय ने सुझाव दिया कि 22 लाख से अधिक छात्रों वाली इस विशाल परीक्षा को अब धीरे-धीरे ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए ताकि पेपर सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके। मोशन एजुकेशन ने घोषणा की है कि वे इस अतिरिक्त तैयारी अवधि के लिए अपने छात्रों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेंगे।
इस प्रशासनिक निर्णय के बीच परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों का दर्द और आक्रोश भी उभरकर सामने आया है। एक ऑटो चालक के पुत्र अली अरमान, जिन्होंने प्रोविजनल आंसर की में 500 से अधिक अंक प्राप्त कर बीडीएस कॉलेज की उम्मीद लगा रखी थी, इस रद्दीकरण को अपने और अपने परिवार के सपनों के टूटने जैसा बताया। वहीं दिवांशु अग्रहरे और सुधांशु जैसे छात्रों का कहना है कि तीन-चार साल की ईमानदारी से की गई मेहनत कुछ लोगों के स्वार्थ और पेपर लीक की घटनाओं की भेंट चढ़ गई है। छात्रों के अनुसार, सीमित सीटों और कड़े कॉम्पिटिशन के बीच बार-बार पेपर लीक होना और परीक्षा का रद्द होना उनके भविष्य के साथ बड़ी नाइंसाफी है। यह घटना न केवल प्रशासनिक चुनौतियों को उजागर करती है, बल्कि उन हजारों मेधावी छात्रों के मानसिक और पेशेवर जीवन पर भी गहरा आघात करती है जो वर्षों तक सामाजिक और पारिवारिक समारोहों का त्याग कर केवल एक लक्ष्य के लिए संघर्ष करते हैं।

Pratahkal Bureau
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