कोटा, 27 फरवरी। अखिल भारतीय सतगुरु मात्रंग ऋषि नवल धर्मसभा एवं नवल धर्मसभा यूथ विंग के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को कोटा के बोरखेड़ा स्थित श्याम रिसोर्ट में 'पांचवां राष्ट्रीय अधिवेशन' आयोजित किया जाएगा। इस एक दिवसीय विशाल समागम में देश के 12 राज्यों से लगभग 3 हजार प्रतिनिधि शिरकत करेंगे। इस दौरान समाज में व्याप्त अंधविश्वास के उन्मूलन और राजनीतिक-सामाजिक सुधारों पर व्यापक चर्चा होगी।

प्रमुख अतिथि और आयोजन की रूपरेखा

प्रदेश अध्यक्ष राकेश सफेला ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उपस्थित रहेंगे। जबकि अध्यक्षता वर्तमान श्री नवलगुरु गादीपति एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य चरणदास महाराज (जोधपुर) द्वारा की जाएगी। विशिष्ट अतिथियों में कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर, झाबर सिंह खर्रा एवं विधायक संदीप शर्मा, कल्पना देवी सहित कई गणमान्य जनप्रतिनिधि समाज का मार्गदर्शन करेंगे।

प्रथम सत्र: राजनीतिक भागीदारी और प्रमुख प्रस्ताव

प्रातः 10 बजे से शुरू होने वाले अधिवेशन के प्रथम सत्र का मुख्य केंद्र समाज की राजनीतिक भागीदारी और महत्वपूर्ण प्रस्ताव रहेंगे। इस सत्र में महर्षि नवल स्वामी के प्रगतिशील विचारों को राज्य के शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल करने, समाज के विद्यार्थियों हेतु छात्रावास के लिए भूमि आवंटन, जोधपुर में महर्षि नवल स्वामी का भव्य पैनोरमा निर्माण और सफाई कर्मचारियों की नई भर्ती प्रक्रिया को जल्द शुरू करने जैसे ठोस प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, स्वामी जी के जन्मोत्सव पर 'सवैतनिक अवकाश' घोषित करने की मांग को लेकर सरकार के समक्ष प्रभावी रणनीति तैयार की जाएगी, ताकि समाज की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को मजबूती मिल सके।

द्वितीय सत्र: सामाजिक सुधार और कुरीति उन्मूलन

दोपहर 2:30 बजे से आयोजित होने वाला द्वितीय सत्र पूरी तरह से सामाजिक सुधार और कुरीति उन्मूलन को समर्पित रहेगा। इस दौरान समाज में गहराई तक पैठी रूढ़िवादिता और अंधविश्वास के विरुद्ध एक राष्ट्रव्यापी जनजागरण अभियान शुरू करने का संकल्प लिया जाएगा। विशेष रूप से 'मृत्यु भोज' जैसी आर्थिक रूप से बोझिल कुप्रथाओं पर पूर्ण रोक लगाने और युवाओं को नशे व कुसंगति से दूर रखकर उन्हें स्वरोजगार व आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर गंभीर मंथन होगा। इसी सत्र में नवल धर्मसभा के आगामी राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव भी संपन्न कराया जाएगा।

अधिवेशन का मूल उद्देश्य और संकल्प

प्रदेश अध्यक्ष राकेश सफेला ने बताया कि "इस अधिवेशन का मूल उद्देश्य वाल्मीकि समाज को अंधविश्वास के अंधेरे से निकालकर शैक्षणिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।" उन्होंने विश्वास जताया कि "यह आयोजन समाज में एकता का नया संचार करेगा और आने वाले समय में राजनीतिक पटल पर समाज की सशक्त उपस्थिति दर्ज कराएगा।" अधिवेशन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और कार्यकर्ताओं में इस वैचारिक महाकुंभ को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।

Pratahkal Newsroom

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