अकलंक कॉलेज ऑफ एजुकेशन, कोटा में राष्ट्रीय ऑनलाइन सेमिनार सम्पन्न जलवायु परिवर्तन, मृदा स्वास्थ्य और पशु संरक्षण पर विशेषज्ञों ने रखे महत्वपूर्ण विचार
अकलंक कॉलेज ऑफ एजुकेशन, कोटा द्वारा विश्व मृदा दिवस पर “Present Scenario of Climate Change: Future of Soil and Animal Health” विषय में राष्ट्रीय ऑनलाइन सेमिनार आयोजित किया गया। देशभर के विशेषज्ञों ने मृदा स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और पशु संरक्षण पर महत्वपूर्ण शोध निष्कर्ष और समाधान प्रस्तुत किए।

कोटा। विश्व मृदा दिवस के अवसर पर अकलंक कॉलेज ऑफ एजुकेशन, बसंत विहार, कोटा ने शनिवार को “Present Scenario of Climate Change: Future of Soil and Animal Health” विषय पर राष्ट्रीय स्तर का एक दिवसीय ऑनलाइन सेमिनार आयोजित किया, जिसने देशभर के शोधार्थियों, पर्यावरणविदों और शिक्षाविदों को एक ही मंच पर गहन विमर्श के लिए जोड़ा। समसामयिक पर्यावरणीय संकटों के समाधान की दिशा में यह आयोजन एक महत्त्वपूर्ण शैक्षणिक पहल के रूप में उभरा।
कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के अध्यक्ष पीयूष जैन, सचिव अनिमेष जैन, कोषाध्यक्ष कपिल जैन, प्राचार्या डॉ. पिंकी श्रीवास्तव और उप-प्राचार्या नम्रता जैन द्वारा मां शारदा की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई। स्वागत उद्बोधन में डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन जैसे गंभीर मुद्दों का समाधान तभी संभव है, जब शैक्षणिक संस्थान शोध और संवाद के लिए सार्थक मंच प्रदान करें।
सेमिनार के मुख्य वक्ता प्रो. दिनेश चंद्र शर्मा (कु. मायावती महिला राजकीय महाविद्यालय, बादलपुर, उ.प्र.) ने संगीत चिकित्सा, मानसिक स्वास्थ्य, पर्यावरण, वन्यजीव और पादप जगत के परस्पर संबंधों पर विस्तृत शोध आधारित व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि पर्यावरणीय असंतुलन न केवल जैव विविधता को प्रभावित करता है, बल्कि मानव और पशु स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है। सेमिनार में डीएफओ (वाइल्डलाइफ) कोटा अनुराग कुमार भटनागर, डॉ. अंचल शर्मा (कृषि विश्वविद्यालय, कोटा), डॉ. जाग्रति त्यागी और डॉ. नितेश वर्मा (डॉ. एमपीएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, आगरा) जैसे विशेषज्ञों ने मृदा क्षरण, मरुस्थलीकरण, टिकाऊ कृषि, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता संरक्षण पर नवीन शोध निष्कर्ष साझा किए।
तकनीकी सत्र–I और II में देशभर से जुड़े प्रतिभागियों ने वैज्ञानिक विषयों पर प्रश्न–उत्तर, संवादात्मक चर्चाओं और शोध प्रस्तुतियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। विशेषज्ञों ने समस्या–समाधान आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के व्यावहारिक उपाय भी सुझाए। निर्धारित 24 कार्यक्रम बिंदुओं के अंतर्गत सभी सत्र सुचारू, समयबद्ध और प्रभावी ढंग से संपन्न हुए।
सेमिनार का सफल समन्वयन डॉ. रंजना गुप्ता, डॉ. सोनल सिंह और उनकी टीम द्वारा किया गया। समापन सत्र में उप-प्राचार्या नम्रता जैन ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन समिति को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए भविष्य में भी ऐसे शोध और नवाचार उन्मुख कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने की घोषणा की।
यह आयोजन न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जागरूकता बढ़ाने वाला मंच बना, बल्कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चिंताओं पर अकादमिक स्तर पर ठोस दिशा प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण कदम भी सिद्ध हुआ।
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Pratahkal Bureau
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